गलियों से रात में आने जाने में लगता है भय
हादसे का भी रहता है खतरा
सासाराम ऑफिस : हर कोई चाहता है कि उसके घर आंगन व गली में रोशनी का डेरा हो,कोई अंधेरे को पास फटकने भी नहीं देना चाहता है लेकिन पाटन गली मोहल्ले के लोग उसी अंधेरे के बीच जीने को मजबूर हैं. इस मुहल्ले में अंधेरे ने डेरा जमा लिया है. शाम ढलते ही अंधेरा चला आता है. जिससे इस मुहल्ले के लोग हमेशा परेशान रहते हैं. विगत चार वर्ष पूर्व अन्य मोहल्ले की तरह इस मोहल्ले में भी नगर-पर्षद सरकार ने स्ट्रीट लगायी थी, जो कई वर्षों तक रोशनी बिखेरती रही लेकिन समय के साथ एक- एक कर सारी बुझती चली गयी, और इस मुहल्ले में अंधेरा अपना डेरा डालता चला गया. अब स्थिति ऐसी है कि इस मोहल्ले की गलियों से रात में आने-जाने में भय प्रतीत होता है. अंधेरे के कारण गली नहीं दिखाई देती है.
इन गलियों में उभरे गढ्ढे भी लोगों को नजर नहीं आते हैं, जिसके कारण कई लोग ठोकर खा कर गिर जाते हैं. साथ ही इन गलियों से रात में अंधेरे के कारण ही आने-जाने में अप्रिय घटना होने का भय भी लगता है. मोहल्ले के लोगों की मानें तो अंधेरे को दूर करने के लिए नगर पर्षद को ठोस कदम उठाने चाहिए. उन्हें चाहिए की अविलंब शहर के जिन क्षेत्रों में अंधेरा सबसे ज्यादा कायम है, उन क्षेत्रों की स्ट्रीट लाइट व सोलर लाइटों को सुधारा जाये. हो सके तो नयी रोशनी का इंतजाम किया जाये. उन जगहों पर भी जहां बिजली से रोशनी होती है. क्योंकि बिजली के जाते ही अंधेरा कायम हो जाता है.
क्या कहते हैं लोग
पता नहीं यह नगर पर्षद की सरकार क्या कर रही है. न हमें ढंग से पानी पीने को मिल रहा है और न ही कोई सुविधा प्राप्त हो रही है. ऊपर से गली में यह अंधेरा. इस बात की गवाही देता है कि इस इलाके पर नगर पर्षद की नजर नहीं है.
रजनीश वर्मा
अंधेरे के कारण इस गली में बूढ़े के साथ साथ जवान व बच्चे भी गिर कर घायल हो चुके हैं. कई लोग गिर कर घायल हो चुके हैं. अबतक लाइट बत्ती का इंतजाम कर देना चाहिए लेकिन नहीं किया जा रहा है जो कि अच्छी बात नहीं.
शमसूद्दीन
गली में रोशनी की जरूरत होती है, क्योंकि इस गली, मोहल्ले के लोग ही नहीं मोहल्ले के आस-पास के लोग रात में यात्रा कर आते हैं. कई इसी गली से होकर रात में ही स्टेशन को जाते हैं.
गुलाम
क्षेत्र के पांच सौ घरों में 3400 से अधिक लोगों को खल रही रोशनी की कमी
नहीं हुई बड़ी घटना
इस इलाके में अबतक कोई बड़ी घटना नहीं हुई है सिवाय छोटी-मोटी चोरी के. अंधेरे के कारण चोरों की चांदी हो जाती है. उन्हें कोई देखने वाला नहीं होता है. साथ ही जब वह चोरी कर के भाग रहे होते हैं, तो उनको आसानी होती है.
