इलाके में स्ट्रीट लाइट होने पर भी अंधेरे का साम्राज्य कायम

नाले की उड़ाही कर सड़क पर डाल दिया जाता है कचरा, लोगों को होती है परेशानी सासाराम ऑफिस : महाजन टोली मुहल्ला शहर का पुराना इलाका है. यहां तंग गलियां हैं और जलजमाव की समस्या भी बनी रहती है. ऐसे में यहां रोशनी की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को काफी परेशानी होती है. गलियों […]

नाले की उड़ाही कर सड़क पर डाल दिया जाता है कचरा, लोगों को होती है परेशानी

सासाराम ऑफिस : महाजन टोली मुहल्ला शहर का पुराना इलाका है. यहां तंग गलियां हैं और जलजमाव की समस्या भी बनी रहती है. ऐसे में यहां रोशनी की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को काफी परेशानी होती है. गलियों में रात के अंधेरे में चलना दुश्वार हो जाता है. महाजन टोली के लिए यह समस्या एक अनबुझ पहेली बन गयी है. क्योंकि, कई वर्ष पहले पूरे शहर के साथ इस इलाके में भी लाईट की समस्या थी. जिससे अंधेरा रहता था. लगभग 2014 में हालात कुछ बदले तो नगर पर्षद ने इस टोली में जगह-जगह स्ट्रीट लाईटों का इंतजाम किया. कुछ वर्ष तो ऐसे ही चला. परंतु, धीरे-धीरे लाईटें बुझती चली गयीं. जिससे फिर से इस इलाके की गलियों में अंधेरा पसर गया.
जब तक सुविधा उपलब्ध नहीं थी तो कोई बात नहीं अब तो इलाके में स्ट्रीट लाईटें हैं तो फिर क्यों अंधेरा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पर्षद सरकार नाली की उड़ाही के लिए करोड़ों रुपये खर्च तो कर सकती है. मगर रोशनी का इंतजाम नहीं कर सकती है. जबकि, इस नाले उड़ाही से निकले कचड़ों को बीच सड़क पर डाल दिया गया है. जिसमें अंधेरे में लोग गिर कर गंदे हो जा रहे हैं. इस टोली में लगभग 300 से 400 घर हैं, जिनमें लगभग 3400 लोग निवास करते हैं. इनको इन गलियों में अंधेरे में आने-जाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.
अंधेरा अच्छी चीज तो है नहीं. हमने नगर पर्षद को शहर की सुविधा के लिए उन्हें चुना है, तो उनको चाहिए की वह हमें सुविधा मुहैया कराएं. ऐसा नहीं है कि वे अपने रुपयों से कोई सुविधा देंगे.
विकास कुमार
2014 वर्ष गलियों के लिए अच्छा था. क्योंकि गलियों में पहली बार रोशनी आयी थी. लोग बिना किसी डर, भय या कोई अप्रिय घटना के सोचे ही रात में आते-जाते थे. अब कम लोग ही घर से निकलते हैं.
रमेश पांडेय
चोरी को छोड़ नहीं हुई कोई बड़ी घटना
इस इलाके में हालांकि कोई बड़ी घटना तो नहीं घटी है मगर छिट-पुट चोरी की घटनाएं हुई हैं. अंधेरा का लाभ गलत मकसद रखने वालों को बखूबी मिल जाता है. अंधेरे के कारण कोई बड़ी घटना को अंजाम दिया जा सकता है.
पूरे शहर के लोगों को सुविधा मिलनी ही चाहिए. यह हमारा अधिकार है. हम नगर पर्षद को टैक्स जमा करते हैं, तो हम चाहेंगे कि हमें सुविधा मिले. रात के अंधेरे में आने-जाने में काफी परेशानी होती है.
अनिल कुमार
मरीजों के इलाज में कोई कोताही न बरतें डॉक्टर

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >