RJD: बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर होने वाले चुनाव के तुरंत बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पार्टी संगठन में बड़ा बदलाव कर सकते हैं. इस फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर हो रही है. सूत्रों के मुताबिक मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल की जगह किसी नए चेहरे को बिहार आरजेडी की कमान सौंपी जा सकती है.
तेजस्वी यादव दिल्ली से पटना लौटते ही पार्टी के जिला अध्यक्षों, वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे. इन बैठकों में आरजेडी को बूथ स्तर पर मजबूत करने, नई रणनीति बनाने और नई प्रदेश कमिटी के गठन पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी. इसके तुरंत बाद नई टीम का एलान हो सकता है. माना जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ संगठन के कई अन्य पदों पर बैठे नेताओं को भी बदला जाएगा.
क्यों नाराज चल रहे हैं मंगनी लाल मंडल?
वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल को पिछले साल यह जिम्मेदारी दी गई थी. हाल ही में उनके द्वारा जारी एक आधिकारिक चिट्ठी की काफी चर्चा हो रही है. इस पत्र में उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के काम करने के तरीके पर नाराजगी जताई थी.
उन्होंने लिखा था कि कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम वरिष्ठ पदाधिकारियों को बिना जानकारी दिए आयोजित किए जा रहे हैं और पार्टी के नियमों की अनदेखी हो रही है. उन्होंने साफ किया था कि अनुशासन तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
रेस में तीन नाम आगे
मंगनी लाल मंडल की संभावित विदाई के बीच नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए पूर्व मंत्री कुमार सर्वजीत और आलोक मेहता के नामों की चर्चा सबसे तेज है. कुमार सर्वजीत इस रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं. वह बोधगया विधानसभा सीट से आरजेडी के विधायक हैं और लालू प्रसाद यादव व तेजस्वी यादव दोनों के बेहद करीबी हैं.
इस रेस में दूसरा बड़ा नाम आलोक मेहता का है. आलोक मेहता के पास केंद्र और बिहार दोनों स्तर की राजनीति का लंबा अनुभव है. वह पूर्व लोकसभा सांसद रह चुके हैं और वर्तमान में उजियारपुर सीट से आरजेडी के विधायक हैं. पार्टी के जमीनी कैडर पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है.
तीसरा नाम राजद सांसद सुधाकर सिंह का है. ये राजद के पूर्व प्रदेश चीफ जगदानंद सिंह के बेटे हैं. जमीन पर इनका पकड़ मजबूत माना जाता है. अगर पार्टी इनको प्रदेश चीफ बनाती है तो वोटरों में संदेश जायेगा कि राजद सिर्फ MY की नहीं बल्कि हर वर्ग को साथ लेकर चलने वाली पार्टी है.
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क्यों हो रहे हैं सांगठनिक बदलाव?
इस फेरबदल की मुख्य वजह पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजे हैं. उस चुनाव में आरजेडी को वोट शेयर तो अच्छा मिला था, लेकिन पार्टी उम्मीद के मुताबिक सीटें नहीं जीत पाई थी और महज 25 सीटों पर सिमट गई थी.
इसी कम सीट संख्या को देखते हुए तेजस्वी यादव अब भविष्य के चुनावों के लिए संगठन की कमियों को दूर करने में जुट गए हैं. वह संगठन को नया खून देने और एक नई आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं.
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