Rajya Sabha Election: बिहार में होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीति पूरी तरह गर्म हो चुकी है. पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवार मैदान में होने के कारण इस बार मुकाबला बेहद रोचक माना जा रहा है. इसी बीच विपक्षी महागठबंधन ने अपनी रणनीति तेज कर दी है.
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को महागठबंधन के विधायकों की अहम बैठक बुलाई है, जहां जीत की रणनीति पर चर्चा की जा रही है और सभी विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश की जा रही है.
होटल में जुटे विधायक, रणनीति पर मंथन
पटना के होटल पनास में महागठबंधन के विधायकों की बैठक हो रही है. इस बैठक में विभिन्न दलों के विधायक पहुंच रहे हैं और राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति तैयार की जा रही है. कई विधायकों को मतदान से पहले यहीं ठहराने की भी तैयारी की गई है, ताकि सभी को एकजुट रखा जा सके और वोटिंग के समय किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे.
बैठक में सभी विधायकों को मतदान की प्रक्रिया के बारे में भी विस्तार से बताया जाएगा. महागठबंधन के नेताओं की कोशिश है कि किसी भी विधायक का वोट तकनीकी गलती से निरस्त न हो. इसी कारण रणनीतिक बैठक में चुनावी गणित और प्रक्रिया दोनों पर चर्चा हो रही है.
AIMIM और अन्य दलों का समर्थन अहम
राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प हो गया है. महागठबंधन की ओर से अमरेद्र धारी सिंह उम्मीदवार हैं, जिन्हें जीत दिलाने के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत मानी जा रही है. ऐसे में AIMIM और बसपा के विधायकों की भूमिका अहम मानी जा रही है.
अगर इन दलों के विधायक महागठबंधन के पक्ष में मतदान करते हैं तो चुनाव का समीकरण बदल सकता है. होटल पनास में AIMIM के विधायक भी पहुंच चुके हैं, जो महागठबंधन के लिए एक बड़ी राहत की खबर हो सकती है. यदि ओवैसी और मायावती के विधायक राजद के पाले में वोट करते हैं, तो एनडीए के गणित का बिगड़ना तय माना जा रहा है.
कांग्रेस के सामने नेतृत्व का सवाल
कांग्रेस के सभी विधायक भी पटना पहुंच चुके हैं, लेकिन पार्टी अब तक विधायक दल के नेता और सचेतक का चुनाव नहीं कर पाई है. ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि विधायकों को अंतिम दिशा-निर्देश कौन देगा. राज्यसभा चुनाव से पहले होने वाली यह गतिविधियां आने वाले समय में बिहार की राजनीति के नए समीकरण भी तय कर सकती हैं.
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