– परीक्षा नियंत्रक ने कहा- टीआर में छेड़छाड़ करनेवाले व्यक्ति या फिर खुद छात्र-छात्रा बताएं टीआर में किस प्रकार से अनाधिकृत परिवर्तन हुआ पूर्णिया. पूर्णिया विवि के टीआर में कटिंग की वजह से उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं की नौकरियों पर संकट आ गया है. दरअसल, नियोक्ता की ओर से इन छात्र-छात्राओं के सर्टिफिकेट को सत्यापन के लिए पूर्णिया विवि भेजा जा रहा है. मगर टीआर में कटिंग, ओवरराइटिंग और काउंटर साइन नदारद रहने से ऐसे छात्र-छात्राओं के सर्टिफिकेट के सत्यापन में पूर्णिया विवि खुद असमंजस में पड़ गया है. ऐसी स्थिति में पूर्णिया विवि अपनी ओर से ही जारी सर्टिफिकेट को सत्यापित करने में पीछे हट रहा है. इस संबंध में पूर्णिया विवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. अमरकांत सिंह ने बताया कि इस प्रकार के मामले पुराने सत्रों से जुड़े हैं. परीक्षा विभाग के पूर्व के पदाधिकारियों के कार्यकाल में जारी किये जा रहे सर्टिफिकेट के सत्यापन कार्य में देखा जा रहा है कि टीआर में कटिंग, ओवर राइटिंग है पर टेबुलेटर का उसमें साइन नहीं है. परीक्षा विभाग के किसी पदाधिकारी का काउंटर साइन भी नहीं है. ऐसे में या तो टीआर में छेड़छाड़ करनेवाले व्यक्ति या फिर खुद छात्र-छात्रा बता सकते हैं कि उनके टीआर में किस प्रकार से अनाधिकृत परिवर्तन किया गया. ———- परीक्षा नियंत्रक का दावा- टीआर में 15 को बनाया गया 45 परीक्षा नियंत्रक प्रो. अमरकांत सिंह ने दावा किया है कि सत्यापन कार्य में टीआर के अवलोकन के दौरान देखा गया कि टीआर में पहले 15 अंक था तो ओवरराइटिंग कर उसे 45 बना दिया गया. प्रथमदृष्टय ही यह गड़बड़ी परीलक्षित हो रही है. ऐसे में सर्टिफिकेट को सत्यापित कर देना कहीं से भी युक्तिसंगत नहीं है. ———— परीक्षा विभाग में इन पदाधिकारियों ने किये हैं कार्य प्रो. विनय कुमार सिंह (रिटायर), प्रो. एके पांडेय( कई महीनों से निलंबित), प्रो. अरविंद कुमार वर्मा(वर्तमान में डीएसडब्लू), प्रो. संतोष कुमार सिंह (वर्तमान में सीसीडीसी), प्रो. नवनीत कुमार (वर्तमान में उपकुलसचिव शैक्षणिक) समेत कई पदाधिकारियों ने पूर्व में महती भूमिका में परीक्षा विभाग में अपना योगदान दिया है. ————– कुलाधिपति से मामले में हस्तक्षेप व उच्चस्तरीय जांच की मांग पूर्णिया विश्वविद्यालय में डिग्री एवं प्रमाण पत्र सत्यापन को लेकर विश्वविद्यालय बनाओ संघर्ष समिति के संस्थापक डॉ. आलोक राज ने कुलाधिपति सह राज्यपाल को आवेदन भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है.आवेदन में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण छात्रों के प्रमाण पत्र जब विभिन्न विभागों से सत्यापन हेतु विश्वविद्यालय भेजे जा रहे हैं, तब कई प्रमाण पत्रों को यह कहकर संदिग्ध अथवा अवैध बताया जा रहा है कि टीआर. में अंक परिवर्तन वाले स्थान पर टेबुलेटर के हस्ताक्षर नहीं हैं. डॉ. आलोक राज ने बताया कि जिन छात्रों को विश्वविद्यालय द्वारा अंकपत्र एवं प्रमाण पत्र निर्गत किए गए हैं, उन पर विश्वविद्यालय के सक्षम पदाधिकारियों के हस्ताक्षर मौजूद हैं. इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर अनेक छात्र नौकरी कर रहे हैं तथा उच्च शिक्षा भी प्राप्त कर चुके हैं. ऐसे में वर्षों बाद छात्रों के परीक्षा परिणाम को अवैध बताना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है. डॉ. आलोक राज ने आरोप लगाया कि यदि टीआर. में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो इसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन एवं परीक्षा विभाग की बनती है.
पूर्णिया विवि के टीआर में कटिंग से उत्तीर्ण छात्रों की नौकरियों पर खतरा, सर्टिफिकेट के सत्यापन से परीक्षा विभाग का इनकार
सर्टिफिकेट के सत्यापन से परीक्षा विभाग का इनकार
