Solar Eclipse 2026: अगस्त 2026 खगोल विज्ञान और ज्योतिष दोनों दृष्टियों से विशेष माना जा रहा है. इस महीने दो बड़े ग्रहण पड़ने वाले हैं, जिनमें पहला 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण और दूसरा 28 अगस्त को आंशिक चंद्र ग्रहण होगा. इन दोनों घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं और संदेश वायरल हो रहे हैं. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इन ग्रहणों का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा और क्या इनके कारण सूतक काल लागू होगा.
पूर्णिया के ज्योतिष मर्मज्ञ पंडित सूरज भारद्वाज के अनुसार, दोनों ग्रहण खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन भारत में दिखाई नहीं देने के कारण इनके संबंध में सूतक काल लागू नहीं माना जाता.
12 अगस्त 2026 को लगेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण
पंडित सूरज भारद्वाज ने बताया कि 12 अगस्त 2026, बुधवार को पड़ने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण खगोल विज्ञान की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है.
पूर्ण सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है. यह घटना दुनिया के कुछ हिस्सों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगी, लेकिन भारत में इसकी दृश्यता नहीं होगी.
28 अगस्त 2026 को होगा आंशिक चंद्र ग्रहण
अगस्त का दूसरा ग्रहण 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को होगा, जो आंशिक चंद्र ग्रहण होगा.
यह ग्रहण भी कई देशों में देखा जा सकेगा, लेकिन भारत में यह दिखाई नहीं देगा. इसलिए देश में इसके कारण किसी प्रकार के धार्मिक प्रतिबंध या सूतक की सामान्य मान्यता लागू नहीं मानी जाती.
भारत में सूतक क्यों नहीं लगेगा?
पंडित सूरज भारद्वाज के अनुसार, ग्रहण से जुड़े सूतक, पूजा-पाठ और धार्मिक नियम मुख्य रूप से ग्रहण की दृश्यता पर आधारित माने जाते हैं.
चूंकि अगस्त 2026 के दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे, इसलिए यहां सूतक काल लागू नहीं होगा और सामान्य धार्मिक गतिविधियां पहले की तरह जारी रखी जा सकती हैं.
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अलग-अलग पंचांग, परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं में कुछ अंतर हो सकता है. इसलिए यदि कोई विशेष धार्मिक अनुष्ठान किया जा रहा हो, तो अपने क्षेत्र के प्रमाणिक पंचांग या विद्वान आचार्य से परामर्श लेना उचित रहेगा.
सोशल मीडिया की अफवाहों से रहें सावधान
उन्होंने कहा कि ग्रहण को लेकर सोशल मीडिया पर अक्सर भ्रामक और अपुष्ट जानकारियां तेजी से फैलती हैं.
लोगों को किसी भी वायरल संदेश पर बिना जांच के विश्वास नहीं करना चाहिए. ग्रहण की तिथि, समय, दृश्यता और धार्मिक नियमों की सही जानकारी प्रमाणिक पंचांग, वैज्ञानिक स्रोतों और विद्वान आचार्यों से ही लेनी चाहिए.
Solar Eclipse 2026: ग्रहण को वैज्ञानिक दृष्टि से भी समझना जरूरी
पंडित सूरज भारद्वाज ने कहा कि ग्रहण केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है.
उन्होंने लोगों से अपील की कि दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण घबराने, भ्रमित होने या अनावश्यक आशंकाएं पालने की आवश्यकता नहीं है. इन घटनाओं को खगोल विज्ञान के दृष्टिकोण से समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
Also Read: पटना: हादसे में युवक की मौत, गुस्साए लोगों ने पुलिस पर किया पथराव; बस समेत कई गाड़ियां फूंकी
Also Read: राजद नई टीम क्यों बना रही है? जानिए संगठन भंग करने के पीछे की वजह
