पारसी शैली में सीता स्वयंवर नाटक का किया गया मंचन

भरत नाट्य कला केंद्र, पूर्णिया ने गत दिनों रूपौली प्रखंड स्थित, लछमिनिया में नवयुवक नाट्य कला परिषद के सहयोग से रामायण पर केंद्रित सीता स्वयंवर नाटक का पारसी शैली में मंचन किया.

पूर्णिया. भरत नाट्य कला केंद्र, पूर्णिया ने गत दिनों रूपौली प्रखंड स्थित, लछमिनिया में नवयुवक नाट्य कला परिषद के सहयोग से रामायण पर केंद्रित सीता स्वयंवर नाटक का पारसी शैली में मंचन किया. दीपक कुमार के नेतृत्व में होने वाले इस नाटक का निर्देशन डॉ विभूति द्वारा किया गया. मुख्य कलाकार थे, रंजन कुमार (विष्णु), मुकेश कुमार (राम), संतोष कुमार (लक्ष्मण) , चंदन कुमार ( परशुराम), अंकित कुमार प्रजापति (नारद, सूर्पनखा), विनोद कुमार (साधु), सूरज कुमार (सीता) , अखिलेश कुमार (कैकेई),नरेश पंडित (वृद्ध),लखन भगत ( विश्वामित्र). रूप सज्जा सियाराम मंडल, अशोक मंडल, सुरेन्द्र मंडल और जयनारायण मंडल ने की. रामायण पर आधारित सीता स्वयंवर का मंचन पारसी शैली में दीपक कुमार द्वारा किया गया. इस दो दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन पोंछ लो, नाटक की प्रस्तुति की गयी. इसके निर्देशक थे डॉ विभूति. इस नाटक में चंदन सिंह, कुणाल आनंद, संतोष कुमार, अभिनव कुमार, अजय कुमार, रंजीत कुमार, सुरेन्द्र मंडल, अंकित कुमार, राजेश मंडल, विनोद पंडित, शंभू मंडल, जयकांत कुमार ने अभिनय किया. नाटक पारसी रंगमंच के प्रमुख आकर्षणों से परिपूर्ण था. रंगीन दृश्यावली और पात्रों के अतिरंजित अभिनय ने दर्शकों का खासा मनोरंजन किया. भरत नाट्य कला केंद्र, भनक के निदेशक सह सचिव, उमेश आदित्य के अनुसार अभी भी पारसी थियेटर हमारे गांवों में जीवित है. ग्रामीण पूरे मनोयोग से इसमें सहयोग करते हैं. पूरी रात चलने वाले इन नाटकों में गीत संगीत और नृत्य भी हुआ करता है. आधुनिक रंगमंच के इस युग में पारसी रंगमंच का होना इसकी गहरी जड़ों का प्रतीक है.

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Author: ARUN KUMAR

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