पूर्णिया जिले के जलालगढ़ प्रक्षेत्र स्थित श्री आनंदकंद रामचंद्र ठाकुरबाड़ी स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए असीम आस्था और आध्यात्मिक चेतना का मुख्य केंद्र है. जलालगढ़ के मुख्य बाजार के बीचों-बीच स्थित होने के कारण इस स्थल का धार्मिक और सामाजिक महत्व काफी अधिक है. यही वजह है कि इस पूरे चौराहे की पहचान ही 'ठाकुरबाड़ी चौक' के नाम से बन चुकी है.
गर्भगृह में विराजते हैं भगवान श्रीराम, माता सीता व लक्ष्मण जी
मंदिर के भव्य गर्भगृह में भगवान श्रीराम, माता जानकी और लक्ष्मण जी की आकर्षक प्रतिमाएं स्थापित हैं. इसके अलावा:
- अन्य देव स्थान: मंदिर परिसर में दिव्य शिवलिंग, हनुमान जी की प्रतिमा तथा निकास द्वार के दक्षिणी भाग में माता शीतला का स्थान स्थापित है.
- ऐतिहासिक कुआं व पवित्र वृक्ष: मंदिर परिसर में एक प्राचीन कुआं है, जिसके जल का प्रयोग आज भी सभी पूजा-अनुष्ठानों में अनिवार्य रूप से किया जाता है. परिसर में स्थित विशाल पीपल और आंवले का वृक्ष वातावरण को और अधिक पवित्र बनाता है.
एकादशी, पूर्णिमा और रविवार को लगता है विशेष भोग
जलालगढ़ बाजार के व्यवसायी, स्थानीय निवासी और विशेषकर मारवाड़ी समाज के लोग अपने दिन की शुरुआत मंदिर में दर्शन-पूजन और माथा टेककर करते हैं:
- विशेष महाप्रसाद आरती: प्रत्येक एकादशी और पूर्णिमा तिथि को मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन होता है.
- रविवार की आरती: हर रविवार की संध्या आरती के अवसर पर विशेष महाप्रसाद का भोग लगाया जाता है, जिसे ग्रहण करने के लिए जलालगढ़ और आसपास के इलाकों से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
अधिकमास में 6 दशकों से हो रहा अखंड रामायण पाठ
ठाकुरबाड़ी की सबसे बड़ी खासियत यहां की दशकों पुरानी आध्यात्मिक परंपरा है. पिछले लगभग छह दशकों (60 वर्षों) से प्रत्येक मलेमास यानी अधिकमास में यहां अखंड 'श्रीरामचरितमानस' पाठ का आयोजन किया जाता है. बड़े भूभाग में फैले इस भव्य ठाकुरबाड़ी परिसर में क्षेत्रवासियों के साथ-साथ यहां से गुजरने वाले राहगीरों को भी असीम मानसिक शांति और सुखद अनुभूति मिलती है.
