बनमनखी (पूर्णिया). पूर्णिया समेत कोसी-सीमांचल क्षेत्र का मखाना अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है. उत्कृष्ट गुणवत्ता, सफेदी, स्वाद और खुशबू के कारण यहां के मखाने की विदेशों में मांग बढ़ रही है. इसी संभावनाओं को परखने के लिए रूस के मॉस्को से छह सदस्यीय डेलिगेशन ने सीमांचल का दौरा किया. अमोघ ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली के निदेशक संदीप अग्रवाल के समन्वय में पहुंचा प्रतिनिधिमंडल बनमनखी की लक्ष्मी इंटरप्राइजेज के निदेशक रोशन अग्रवाल की अगुवाई में क्षेत्र की प्रमुख मखाना प्रोसेसिंग इकाइयों में गया और उत्पादन से लेकर पैकेजिंग तक की प्रक्रिया को करीब से समझा.
फारबिसगंज और कटिहार की प्रोसेसिंग यूनिट का किया निरीक्षण
डेलिगेशन ने फारबिसगंज स्थित गोलछा उद्योग और कटिहार की व्हाइट पॉप्स कंपनी का निरीक्षण किया. इन इकाइयों में आधुनिक तकनीक से रोस्टेड मखाना तैयार किया जा रहा है. प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को मखाना की सफाई, प्रोसेसिंग, रोस्टिंग और पैकेजिंग की पूरी प्रक्रिया दिखाई गयी. निरीक्षण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने इकाइयों की तकनीकी दक्षता, स्वच्छता और गुणवत्ता नियंत्रण की जानकारी ली. रोस्टेड मखाना के स्वाद और कुरकुरेपन को भी सदस्यों ने पसंद किया.
अगले माह रूस भेजा जाएगा 100 टन रोस्टेड मखाना
अमोघ ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक संदीप अग्रवाल ने बताया कि रूसी डेलिगेशन की सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद अगले माह 100 टन रोस्टेड मखाना रूस निर्यात करने की तैयारी है. उन्होंने बताया कि मखाना को पहले दिल्ली भेजा जाएगा और इसके बाद मुंबई पोर्ट के माध्यम से रूस भेजा जाएगा.
उन्होंने कहा कि पूरी निर्यात प्रक्रिया लक्ष्मी इंटरप्राइजेज, बनमनखी की देखरेख में पूरी की जाएगी. उनके अनुसार कोसी-सीमांचल क्षेत्र का मखाना अंतरराष्ट्रीय बाजार की गुणवत्ता संबंधी जरूरतों के अनुरूप बेहतर संभावनाएं रखता है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार से किसानों को बेहतर मूल्य की उम्मीद
संदीप अग्रवाल ने कहा कि रूस को मखाना निर्यात की संभावित शुरुआत केवल व्यापारिक विस्तार नहीं है, बल्कि क्षेत्र के हजारों मखाना किसानों के लिए भी नई उम्मीद लेकर आई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलने से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है. इसके साथ ही मखाना की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और परिवहन से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है. इससे उत्पादन से लेकर बाजार तक मखाना आधारित पूरी अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है.
प्राकृतिक अनुकूलता और किसानों की मेहनत बनी ताकत
स्थानीय उद्यमी रोशन अग्रवाल ने कहा कि कोसी-सीमांचल के किसानों की मेहनत और क्षेत्र की प्राकृतिक अनुकूलता मखाना कारोबार की सबसे बड़ी ताकत है. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बेहतर सुविधाएं, प्रशिक्षण और निर्यात को प्रोत्साहन मिलता रहे तो यह क्षेत्र मखाना उत्पादन और निर्यात का देश का अग्रणी केंद्र बन सकता है.
सुपरफूड के रूप में बढ़ रही मखाने की मांग
मखाना को वैश्विक बाजार में सुपरफूड के रूप में भी पहचान मिल रही है. कम कैलोरी और पोषण संबंधी खूबियों के कारण स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग बढ़ने की संभावना है. विदेशी बाजारों में बढ़ती रुचि के बीच रूस जैसे बाजारों का सीमांचल के उत्पादकों और प्रोसेसिंग इकाइयों की ओर आकर्षित होना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
किसानों के लिए खुल रहा निर्यात का नया रास्ता
मखाना की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने से क्षेत्र के किसानों को बेहतर बाजार और दाम मिलने की उम्मीद जगी है. विशेषज्ञों के अनुसार वैज्ञानिक खेती, आधुनिक प्रोसेसिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और बेहतर मार्केटिंग पर ध्यान दिया जाए तो मखाना किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. रूस को प्रस्तावित 100 टन रोस्टेड मखाना का निर्यात सीमांचल के मखाना कारोबार के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है. इससे क्षेत्र के उत्पादकों और उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता मिल सकता है.
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