Rakshabandhan: पूर्णिया. आगामी 28 अगस्त, शुक्रवार को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा. ज्योतिषाचार्य पंडित सूरज भारद्वाज के अनुसार इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा, इसलिए बहनें पूरे दिन अपने भाइयों को राखी बांध सकेंगी. उन्होंने बताया कि इस बार करीब 27 वर्ष बाद रक्षाबंधन के अवसर पर 11 महायोग बन रहे हैं, जिससे पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है.
27 अगस्त को लगेगी पूर्णिमा तिथि
पंडित सूरज भारद्वाज के अनुसार पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 8:38 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह 9:26 बजे तक रहेगी. उदया तिथि की मान्यता के कारण रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा.
भद्रा का साया नहीं रहेगा
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि पूर्णिमा तिथि शुरू होने के साथ ही 27 अगस्त को भद्रा भी रहेगी, लेकिन रात 8:54 बजे तक यह समाप्त हो जाएगी. ऐसे में 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन भद्रा का कोई प्रभाव नहीं रहेगा. बहनें दिनभर शुभ समय के अनुसार भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकेंगी.
सुबह 5:41 से 9:26 बजे तक विशेष अनुष्ठान का समय
पंडित भारद्वाज के अनुसार रक्षाबंधन के दिन सुबह 5:41 बजे से 9:26 बजे तक का समय विशेष अनुष्ठान के लिए महत्वपूर्ण माना गया है. इस दौरान बहनें पूजा-अर्चना के बाद भाई को तिलक लगाकर रक्षा सूत्र बांध सकती हैं.
रक्षाबंधन पर बनेंगे कई शुभ योग
इस बार रक्षाबंधन पर शतभिषा नक्षत्र रहेगा. पंडित भारद्वाज के अनुसार अतिगंड, शोभन, श्रीवत्स, सौम्य और ययीजय योग के साथ चंद्राधि, बुधादित्य, विमल विपरीत राजयोग, धन, उभयचरी, शकट और सुनफा योग का भी निर्माण होगा. उन्होंने इन योगों को पर्व के लिए विशेष शुभ बताया.
सूर्य और गुरु बना रहे विशिष्ट योग
ज्योतिषाचार्य के अनुसार रक्षाबंधन के दौरान सूर्य और गुरु अपनी उच्च राशियों में रहकर विशिष्ट योग बनाएंगे. उनका कहना है कि लंबे अंतराल के बाद बन रहे इन योगों के कारण इस बार रक्षाबंधन का पर्व धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है.
भाई-बहन के स्नेह का पर्व है रक्षाबंधन
Rakshabandhan: रक्षाबंधन हिंदू और जैन परंपरा में मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है. श्रावण मास में मनाए जाने के कारण इसे श्रावणी या सलूनो भी कहा जाता है. इस दिन बहनें भाइयों के मस्तक पर तिलक लगाकर रक्षा सूत्र बांधती हैं और भाइयों के सुख, समृद्धि एवं दीर्घायु की कामना करती हैं. वहीं भाई बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हैं.
