पूर्णिया का रजनी चौक हनुमान मंदिर : पांच दशक से अधिक पुरानी आस्था, जहां भक्त मांगते हैं मन की मुराद

पूर्णिया के रजनी चौक पर स्थित हनुमान मंदिर पांच दशक से अधिक समय से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, और विशेष अवसरों पर उत्सव जैसा माहौल रहता है.

पूर्णिया शहर के रजनी चौक पर स्थित भगवान हनुमान का मंदिर श्रद्धालुओं की असीम आस्था का प्रमुख केंद्र है. विशेष रूप से शनिवार और मंगलवार को यहां दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते हैं और आरती में शामिल होते हैं.

भक्तों की मान्यता है कि सच्चे मन से मंदिर में पहुंचकर पूजा करने वालों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु यहां अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं.

विशेष अवसरों पर रहता है उत्सव जैसा माहौल

पूर्णिया शहर के हृदय कहे जाने वाले भट्ठा बाजार से आगे रजनी चौक स्थित इस हनुमान मंदिर में विशेष पर्व और अवसरों पर उत्सव जैसा माहौल रहता है. रामनवमी के अवसर पर आसपास के घरों से ध्वज लाकर मंदिर परिसर में ध्वजारोहण किया जाता है.

वहीं हनुमान जयंती पर विशेष पूजा-अनुष्ठान के साथ विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं. इन आयोजनों में केवल रजनी चौक और आसपास के लोग ही नहीं, बल्कि पूरे शहर के श्रद्धालु भाग लेते हैं.

फूस की झोपड़ी से भव्य मंदिर तक का सफर

स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार इस मंदिर का इतिहास पांच दशकों से भी अधिक पुराना है. बताया जाता है कि सत्तर के दशक से पहले यहां फूस की झोपड़ीनुमा संरचना में भगवान हनुमान की प्रतिमा स्थापित थी. उस समय रजनी चौक पर आज की तरह चहल-पहल नहीं होती थी और यहां रिक्शा व ठेला चालकों का अधिक जमावड़ा रहता था.

स्थानीय लोगों के अनुसार अस्सी के दशक में मंदिर का पक्का निर्माण कराया गया. इसके बाद समय के साथ मंदिर को और भव्य स्वरूप दिया गया. आज रजनी चौक का हनुमान मंदिर पूर्णिया शहर में आस्था, विश्वास और धार्मिक परंपरा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.


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लेखक के बारे में

By अरुण कुमार

अरुण कुमार प्रिंट माध्यम में 32 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक हिन्दुस्तान से की. अभी प्रभात खबर के पूर्णिया कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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