नये साल में देश के पर्यटन विकास के मानचित्र पर दिखेगा पूर्णिया

मुख्यमंत्री ने की थी पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने घोषणा

पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने के लिए बनकर तैयार है मंदिर का नया मॉडल

प्रगति यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने की थी पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने घोषणा

पूर्णिया. नये साल में पूर्णिया को बड़ी सौगात मिलने वाली है. आने वाले साल में अपना पूर्णिया देश के पर्यटन विकास के मानचित्र पर दिखने लगेगा. अगले साल पूर्णिया का पुरणदेवी मंदिर बिहार का बड़ा और खूबसूरत पर्यटन स्थल बनने वाला है. प्रगति यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसकी घोषणा की थी. अहम यह है कि इस परियोजना को राज्य सरकार की स्वीकृति भी मिल गई और अब पर्यटन विभाग द्वारा मंदिर समेत आसपास के भूखंड को पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने के कवायद भी शुरू कर दी गई है. पूर्णिया की इस ऐतिहासिक मंदिर को अत्याधुनिक मॉडल के रुप में विकसित किया जाएगा जिसका मॉडल पहले ही तैयार किया जा चुका है.

जिला मुख्यालय से करीब आठ किलो मीटर दूर मुगलों के जमाने के पूर्णिया सिटी स्थित पूरणदेवी मंदिर से न केवल पूर्णिया बल्कि पड़ोसी देश नेपाल व पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के लोगों की आस्था जुड़ी है. यहां दूर-दराज के श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और देवी दर्शन कर चढावा चढाते हैं. पूर्णिया सिटी के इलाके में यह मंदिर ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर के रूप में अवस्थित है. एक जमाने में पूर्ण अरण्य से आच्छादित पूर्णिया की इस धरती पर अवस्थित पुरणदेवी मंदिर को वन देवी भी कहा जाता था. वैसे, आज भी आस पास पुराने पेड़-पौधे इस बात का अहसास दिलाते हैं. ऐसा कहा जाता है कि माता पुरणदेवी के नाम से ही इस शहर का नाम पूर्णिया हुआ. इस लिहाज से यह पूर्णिया की पहचान है जिसका इतिहास पांच सौ साल पुराना बताया गया है. मंदिर निर्माण के लिए तत्कालीन नवाब शौकत अली ने जमीन दान में दी थी. किसी जमाने में मंदिर के समीप से सौरा नदी गुजरती थी जिसकी धारा कालांतर में बदल गई.

दशकों से हो रही है पर्यटन स्थल बनाने की मांग

दरअसल, मां पुरणदेवी मंदिर को पर्यटन स्थल के रुप में विकसित किए जाने की मांग कई दशकों से होती रही है. हालांकि बीच के सालों में मंदिर के विकास के रुप में छिटपुट कार्य हुए पर पर्यटन स्थल इसे नहीं बनाया जा सका. इस बीच प्रगति यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा कर दीऔर फिर प्रशासनिक स्तर पर इसे पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने की परियोजना तैयार की गई. इसके लिए इसका मॉडल इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह के मानचित्र पर पर्यटन स्थल के रुप में नजर आए. नई योजना के अनुसार, यहां सप्तर्षि की स्थापना समेत भक्ति के विभिन्न रूपों के स्थापन के लिए संरचना तैयार होगी. पैदल पार पथ को संभालने के लिए शक्ति के प्रतीक के रुप भव्य व विशाल दो हाथ होंगे. दो भव्य प्रवेश एवं निकास द्वार भी शोभा बढ़ाएगा. इसके साथ ही पार्क, पाथ वे एवं विश्राम स्थल भी बनेगा. श्रद्धालुओं के रहने के लिए आकर्षक गेस्ट हाउस होगा तो कॉटेज और मंडप विशेष आकर्षण होंगे. इसके सौंदर्यीकरण और सुविधाओं के निर्माण में 34 करोड़ से अधिक लागत आएगी.

टोपोग्राफिकल सर्वे का काम सम्पन्न

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुरणदेवी मंदिर में पर्यटकीय सुविधाओं के विकास के लिए पटना की टीम द्वारा टोपोग्राफिकल सर्वे किया गया है. कहते हैं, मंदिर परिसर में पर्यटकीय सुविधाओं के विकास के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं को काफी सहूलियत होगी जबकि पूर्णिया प्रमंडल के अलावा पड़ोसी जिलों के लोग भी धार्मिक यात्रा पर यहां आयेंगे. जानकारों ने बताया कि इस पौराणिक मंदिर को नया लुक देने के लिए मॉडल के अनुरुप निर्माण किया जाएगा. बेहतर आवाजाही के लिए यहां फुट ओवर ब्रिज कोरीडोर का निर्माण होगा वहीं सड़क के उत्तरी और दक्षिणी भाग को जोड़ने वाला पैदल पार पथ का भी निर्माण होगा. भक्तों की सहज आवाजाही के लिए एक तरफ फुट ओवर ब्रिज कोरीडोर बनेगा तो दूसरी तरफ सड़क के उत्तरी और दक्षिणी भाग को जोड़ने के लिए पैदल पार पथ भी बनाया जाएगा. स्टेट हाइवे के साथ भी इसे कनेक्ट करने की भी योजना है. —————

आंकड़ों का आईना

34.10 करोड़ के करीब परियोजना पर आएगा कुल खर्च

12 एकड़ मंदिर के समीप स्थित भूखंड का किया गया अधिग्रहण

700 मीटर तक बनाया जाना है स्टेट हाइवे का सम्पर्क पथ

5.50 करोड़ की लागत से बनेगी कनेक्टिविटी सड़क

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