पूर्णिया विश्वविद्यालय (PU) इन दिनों गंभीर वित्तीय संकट और कोष (बजट) के अभाव से जूझ रहा है. आलम यह है कि पिछले कई महीनों से लंबित गेस्ट लेक्चरर (अतिथि सहायक प्राध्यापकों) के मानदेय का भुगतान करने में भी विश्वविद्यालय प्रशासन असमर्थ साबित हो रहा है. इस विकट स्थिति को देखते हुए विवि प्रशासन ने मानवीय आधार पर एक बड़ा फैसला लिया है. कुलसचिव ने विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले सभी अंगीभूत कॉलेजों को अपने आंतरिक स्रोत (इंटरनल फंड) से गेस्ट लेक्चरर को दो महीने का अग्रिम मानदेय भुगतान करने का लिखित निर्देश दिया है.
कुलसचिव ने जारी किया आधिकारिक पत्र
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. अखिलेश कुमार सिंह द्वारा 16 जुलाई को जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, सभी प्राचार्यों को अपने-अपने स्तर से अतिथि शिक्षकों के पारिश्रमिक का रास्ता साफ करने को कहा गया है:
- 2 महीने का अग्रिम भुगतान: कॉलेजों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने परिसर में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को उनके लंबित मानदेय के एवज में दो महीने का अग्रिम (एडवांस) पारिश्रमिक कॉलेज के आंतरिक फंड से तुरंत भुगतान करें.
- भविष्य में होगा समायोजन: पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कॉलेजों द्वारा भुगतान की गई इस राशि का समायोजन (एडजस्टमेंट) भविष्य में विवि द्वारा प्रेषित की जाने वाली बजट मांग विवरणी के माध्यम से कर लिया जाएगा.
विवि मीडिया पदाधिकारी बोले—"यह बिल्कुल सामान्य प्रक्रिया है"
इस वित्तीय संकट और आंतरिक फंड के इस्तेमाल को लेकर जब विश्वविद्यालय के मीडिया पदाधिकारी प्रो. संतोष कुमार सिंह से बात की गई, तो उन्होंने विवि का पक्ष रखते हुए कहा:
"अतिथि सहायक प्राध्यापकों की समस्याओं को देखते हुए यह तात्कालिक व्यवस्था की गई है. जैसे ही राज्य सरकार की ओर से इस मद (उच्च शिक्षा विभाग) का बजटीय आवंटन विश्वविद्यालय को प्राप्त होगा, कॉलेजों से ली गई यह राशि उन्हें वापस लौटा दी जाएगी. पूर्णिया विश्वविद्यालय में पहले भी संकट के समय इस प्रकार से भुगतान की व्यवस्था की गई है, इसलिए यह कोई नई बात नहीं बल्कि एक बिल्कुल सामान्य और वैधानिक प्रक्रिया है."
इतिहास फिर दोहराया: 2018 के ₹1.20 करोड़ का विवाद भी गरमाया
विश्वविद्यालय द्वारा कॉलेजों से वित्तीय सहयोग मांगने के इस फैसले के बाद कैंपस में एक पुराना विवाद फिर से चर्चा का विषय बन गया है.
जानकारों और सिंडिकेट सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2018 में जब पूर्णिया विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी, तब शुरुआत में वित्तीय संचालन और प्रशासनिक खर्चों को पूरा करने के लिए पूर्णिया कॉलेज को छोड़कर शेष 12 अंगीभूत कॉलेजों ने विश्वविद्यालय को ₹10-10 लाख (कुल 1 करोड़ 20 लाख रुपये) का ऋण/सहयोग दिया था. स्थापना के इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी उन रुपयों की वापसी या विवि के खातों में उसकी वर्तमान वित्तीय स्थिति आज तक स्पष्ट नहीं हो सकी है. ऐसे में दोबारा कॉलेजों के आंतरिक कोष पर निर्भर होने से कॉलेजों के अपने विकास कार्यों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
