Purnia News: बिहार के पूर्णिया जिले ने टीबी मुक्त भारत अभियान में ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. महज एक महीने में जिले ने टीबी स्क्रीनिंग का 216 प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया. 2 जुलाई से 31 जुलाई के बीच 3 लाख 3 हजार 668 लोगों की टीबी जांच की गई, जो निर्धारित लक्ष्य से दोगुने से भी अधिक है. खास बात यह है कि अभियान केवल जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जिन मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई, उन्हें तत्काल इलाज, दवाएं और पोषण सहायता भी उपलब्ध कराई गई.
एक महीने में बना नया रिकॉर्ड
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पूर्णिया में चलाए गए विशेष टीबी स्क्रीनिंग अभियान ने अपेक्षा से कहीं बेहतर परिणाम दिए. जिले के सभी प्रखंडों में स्वास्थ्यकर्मियों की टीमों ने घर-घर पहुंचकर संभावित मरीजों की पहचान की. इसी व्यापक अभियान का परिणाम रहा कि 3.03 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई और लक्ष्य का 216 प्रतिशत हासिल किया गया.
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि टीबी जैसी बीमारी में समय पर जांच और इलाज सबसे बड़ा हथियार माना जाता है. जितनी जल्दी मरीज की पहचान होती है, उतनी ही जल्दी संक्रमण की श्रृंखला को रोका जा सकता है.
प्रशासनिक मॉनिटरिंग का दिखा असर
जिलाधिकारी अंशुल कुमार और सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार कनौजिया के निर्देश पर अभियान को तेज गति से चलाया गया. जिला स्वास्थ्य समिति, सीएचओ, एएनएम, एसटीएस, एसटीएलएस, बीएचएम और बीसीएम समेत स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न टीमों ने समन्वित तरीके से काम किया.
अभियान की नियमित समीक्षा और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने के कारण बड़ी संख्या में लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकीं. जिला संचारी रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. तनवीर हैदर ने बताया कि अभियान की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि संभावित मरीजों की पहचान समय रहते हो सके.
जांच के आंकड़े बताते हैं अभियान की व्यापकता
अभियान के दौरान 11,073 एक्स-रे किए गए. इसके अलावा 6,762 नाट जांच, 544 अन्य रोगों से पीड़ित मरीजों की टीबी जांच और 1,460 टीबीटी जांच की गई. जिन लोगों में टीबी संक्रमण की पुष्टि हुई, उन्हें तुरंत आवश्यक दवाएं और चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई गई.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग से ऐसे मरीजों की पहचान संभव होती है, जो शुरुआती लक्षणों को सामान्य खांसी या कमजोरी समझकर इलाज नहीं कराते. ऐसे मामलों में समय पर हस्तक्षेप बीमारी के प्रसार को रोकने में मदद करता है.
इलाज के साथ पोषण सहायता भी
टीबी के इलाज में केवल दवा ही नहीं, बल्कि उचित पोषण भी बेहद जरूरी होता है. इसी को ध्यान में रखते हुए निक्षय मित्र योजना के माध्यम से मरीजों को पोषण सहायता दी जा रही है. जुलाई महीने में पूर्णिया जिले के टीबी मरीजों के बीच 501 फूड बास्केट वितरित किए गए.
यह पहल उन परिवारों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां आर्थिक कठिनाइयों के कारण मरीज पर्याप्त पोषण नहीं ले पाते. निक्षय मित्र मरीजों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराकर उनके शीघ्र स्वस्थ होने में सहयोग कर रहे हैं.
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा
पूर्णिया में बड़े पैमाने पर टीबी स्क्रीनिंग का सीधा लाभ आम लोगों को मिलेगा. समय पर जांच होने से संक्रमित व्यक्ति का इलाज जल्दी शुरू होगा और संक्रमण फैलने की संभावना कम होगी. इससे परिवार, स्कूल, कार्यस्थल और समुदाय स्तर पर टीबी के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इसी तरह नियमित स्क्रीनिंग, उपचार और पोषण सहायता जारी रही, तो पूर्णिया टीबी मुक्त भारत अभियान के राष्ट्रीय लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले जिलों में शामिल हो सकता है.
Purnia News: आगे का लक्ष्य क्या है
स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि टीबी के हर संभावित मरीज तक समय पर जांच और इलाज पहुंचाना है. प्रशासन का फोकस अब भी संवेदनशील इलाकों, कमजोर वर्गों और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में स्क्रीनिंग बढ़ाने पर है. निक्षय मित्रों के सहयोग से पोषण सहायता का दायरा भी आगे बढ़ाया जाएगा ताकि इलाज बीच में न छूटे और मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकें.
