अधिकमास में श्री आनंदकंद ठाकुरबाड़ी में गूंजा श्रीरामचरित मानस, 30 दिनों तक भक्तिमय माहौल

Purnia Jalalgarh Ramayan Path: अधिकमास के अवसर पर पूर्णिया के जलालगढ़ स्थित श्री आनंदकंद रामचंद्र ठाकुरबाड़ी में एक बार फिर रामधुन गूंज उठी है. परंपरा के अनुसार शुरू हुआ श्रीरामचरित मानस पाठ 30 दिनों तक चलेगा और पूरा क्षेत्र भक्ति रस में डूबा रहेगा.

Purnia Jalalgarh Ramayan Path: पूर्णिया के जलालगढ़ से निकेश राय की रिपोर्ट. अधिकमास को लेकर जलालगढ़ स्थित श्री आनंदकंद रामचंद्र ठाकुरबाड़ी में श्रीरामचरित मानस पाठ की शुरुआत की गई है. यह धार्मिक आयोजन 15 जून तक चलेगा. मंदिर प्रशासन के अनुसार यह परंपरा मंदिर स्थापना काल से ही चली आ रही है, जिसमें हर अधिकमास में नियमित रूप से रामायण पाठ का आयोजन किया जाता है. इस वर्ष भी 30 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में स्थानीय वाचकों द्वारा क्रमवार श्रीरामचरित मानस का पाठ किया जा रहा है.

परंपरा से जुड़ा आस्था का संगम

मंदिर के पुजारी पंडित शिवानंद पांडेय ने बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक गहरी परंपरा और आस्था का प्रतीक है. अधिकमास, जिसे मलेमास भी कहा जाता है, इस वर्ष प्रथम ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष से लेकर द्वितीय ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष तक माना गया है.

इस दौरान प्रतिदिन रामायण पाठ का आयोजन भक्तों के बीच आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का संचार कर रहा है.

30 दिनों तक लगातार रामायण पाठ

इस बार पूरे 30 दिनों तक श्रीरामचरित मानस का पाठ करने की व्यवस्था की गई है. स्थानीय वाचक निर्धारित समय पर बारी-बारी से पाठ कर रहे हैं. मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है.

भक्तों की भीड़ सुबह से ही मंदिर परिसर में जुटने लगती है और दिनभर रामकथा के स्वर गूंजते रहते हैं.

आयोजन समिति की सक्रिय भूमिका

इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में कई स्थानीय लोगों और आयोजकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. इनमें अनिल जोशी, सुनीता जोशी, पंडित शिवानंद पांडेय, केदारनाथ ठाकुर, गोविंद शर्मा, अशोक विश्वास, सतीश मांडीवाल, योगेंद्र ठाकुर, महेश पंसारी, संदीप अग्रवाल और अमित चौधरी सहित कई लोग सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं.

पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल

रामायण पाठ शुरू होते ही जलालगढ़ क्षेत्र का माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया है. सुबह-शाम मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और मानस पाठ की गूंज लोगों को आकर्षित कर रही है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस आयोजन से न केवल धार्मिक वातावरण मजबूत होता है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा भी सुदृढ़ होती है.

आस्था और परंपरा का जीवंत उदाहरण

अधिकमास में आयोजित यह रामचरित मानस पाठ क्षेत्र में आस्था और परंपरा का जीवंत उदाहरण बन गया है. भक्तों का विश्वास है कि इस तरह के आयोजन से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार होता है.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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