पूर्णिया में बाबा मनसिद्धि नाथ महादेव मंदिर में दर्शन मात्र से पूरी होती हैं मन्नतें, सुबह-शाम उमड़ती है भक्तों की भीड़

Aaj Ka Darshan : पूर्णिया शहर का बाबा मनसिद्धि नाथ महादेव मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से दर्शन करने पर बंद किस्मत के दरवाजे भी खुल जाते हैं.

Aaj Ka Darshan : पूर्णिया से अखिलेश चन्द्रा की रिपोर्ट. पूर्णिया के पॉलिटेक्निक चौक स्थित रामनगर का श्री श्री 108 बाबा मनसिद्धि नाथ महादेव मंदिर शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में गिना जाता है. राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित होने के कारण यहां स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से गुजरने वाले यात्री भी माथा टेकने पहुंचते हैं. सावन, सोमवार और महाशिवरात्रि पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, लेकिन सामान्य दिनों में भी सुबह और शाम मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से गुलजार रहता है.

सुबह से ही शुरू हो जाता है जलाभिषेक का सिलसिला

बाबा मनसिद्धि नाथ महादेव मंदिर में हर दिन सुबह से ही भक्तों का आना शुरू हो जाता है. लोग भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा भक्तों को बार-बार मंदिर की ओर खींच लाती है.

राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे होने की वजह से यह मंदिर राहगीरों के लिए भी आस्था का प्रमुख ठिकाना बन गया है. कई यात्री सफर के दौरान यहां रुककर भगवान शिव के दर्शन करते हैं और फिर आगे की यात्रा शुरू करते हैं.

दर्शन मात्र से खुलते हैं भाग्य के दरवाजे

मंदिर को लेकर एक गहरी धार्मिक मान्यता भी प्रचलित है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा मनसिद्धि नाथ के दरबार में सच्चे मन से दर्शन करने पर जीवन की बाधाएं दूर हो जाती हैं और बंद भाग्य के दरवाजे खुल जाते हैं. यही वजह है कि दूर-दराज के लोग भी यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं.

कई श्रद्धालु नियमित रूप से यहां जलाभिषेक करते हैं. विशेष अवसरों पर मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठता है और पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है.

मन्नत पूरी होने पर कराते हैं रुद्राभिषेक

स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि मंदिर में वर्षों से शिवस्तुति और रुद्राभिषेक की परंपरा चली आ रही है. भक्त अपनी मन्नत पूरी होने की कामना से यहां विशेष पूजन और अनुष्ठान कराते हैं. सावन महीने में तो यहां रुद्राभिषेक और शिवस्तुति के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग जाती है.

मंदिर की धार्मिक मान्यता और भक्तों की अटूट आस्था ही इसे पूर्णिया शहर का एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बनाती है.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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