पूर्णिया में कजरी, सोहर और झूमर की धुनों पर थिरकी नई पीढ़ी! विलुप्तप्राय लोक कलाओं को जीवंत बनाने की शानदार मुहिम

पूर्णिया में 15 दिवसीय निःशुल्क कार्यशाला में बिहार की विलुप्तप्राय लोकगीत और लोकनृत्य विधाओं को सहेजने का प्रयास किया जा रहा है. कजरी, झूमर, सोहर जैसे पारंपरिक गीतों और नृत्यों का अभ्यास कराया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी इन लोक कलाओं से जुड़ सके.

पूर्णिया. कला एवं संस्कृति विभाग तथा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय प्रेक्षागृह सह आर्ट गैलरी स्थित आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र में 15 दिवसीय निःशुल्क कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है. कार्यशाला में प्रशिक्षकों द्वारा प्रतिभागियों को बिहार की विलुप्तप्राय लोकगीत और लोकनृत्य विधाओं का लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है. 25 अगस्त से शुरू हुई कार्यशाला 8 सितंबर तक चलेगी. प्रशिक्षण को लेकर प्रतिभागियों में खासा उत्साह है.

कजरी, झूमर से लेकर सोहर और बारहमासा तक का अभ्यास

कार्यशाला के दसवें दिन प्रतिभागियों को कजरी, झूमर, धोबिया, सोहर, चौमासा और बारहमासा जैसे पारंपरिक लोकगीतों का अभ्यास कराया गया. इसके साथ कजरी, सोहर, झूमर और पामरिया लोकनृत्य की बारीकियां भी सिखायी गयीं. नये रजिस्ट्रेशन कराने वाले कलाकारों और बच्चों को भी इन लोक विधाओं से परिचित कराया गया.

परंपरागत स्वरूप के साथ शास्त्र और प्रयोग पक्ष की जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान लोक विधाओं के मूल एवं पारंपरिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर जोर दिया जा रहा है. कलाकारों को लोकगीत और लोकनृत्य के शास्त्र पक्ष के साथ प्रयोग पक्ष की भी जानकारी दी जा रही है. इसके अलावा बेहतर मंचीय प्रस्तुति के लिए एक साथ लोक गायन और लोक नृत्य प्रस्तुत करने के तरीके भी सिखाए जा रहे हैं.

नई पीढ़ी तक लोक परंपराओं को पहुंचाने का प्रयास

जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी पंकज कुमार पटेल ने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बिहार की विलुप्तप्राय लोकगीत और लोकनृत्य विधाओं को जीवंत बनाए रखना और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना है. उन्होंने कहा कि पारंपरिक लोक विधाओं के संरक्षण के लिए बच्चों और युवा कलाकारों को इनसे जोड़ना जरूरी है.

अब सिर्फ प्रशिक्षण, 8 सितंबर को होगा समापन

पंकज कुमार पटेल ने बताया कि गुरुवार को कार्यशाला में नामांकन और रजिस्ट्रेशन का अंतिम दिन था. अब कार्यशाला के शेष दिनों में केवल प्रशिक्षण का कार्यक्रम चलेगा. 8 सितंबर को 15 दिवसीय कार्यशाला का समापन किया जाएगा.

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By सत्येन्द्र सिन्हा गोपी

सत्येन्द्र सिन्हा गोपी प्रिंट माध्यम में 25 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. आकाशवाणी एवं दूरदर्शन समाचार से पत्रकारिता की शुरुआत की. नाटक, कला संस्कृति, गीत संगीत, कृषि व मेडिकल क्षेत्र में विशेष अभिरुचि रखते हैं.

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