– पिछले एक साल में छात्रों के हंगामे के आधा दर्जन वाकयों में टूटी मर्यादाएं – सीनेट बैठक से लेकर विवि स्थापना दिवस समारोह तक बीता असहज पूर्णिया. पिछले छह साल से छात्र संघ को चुनाव टालना पूर्णिया विवि को अब महंगा पड़ रहा है. आलम यह है कि अधिकृत छात्र प्रतिनिधि के अभाव में छात्रों के कई नुमाइंदे खड़े हो गये हैं. छात्रों के इन नुमाइंदों से समुचित संवाद के अभाव में पूर्णिया विवि को अब अपने हरेक कार्यक्रम में हंगामे की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. पिछले एक साल में लगभग आधा दर्जन ऐसे गंभीर वाकये हुए . चंद रोज पहले 18 मार्च को विवि स्थापना दिवस समारोह के दौरान हुए हंगामे में संवाद का स्तर भी पूरी तरह से नीचे गिर गया. इससे पहले 30 जनवरी को सीनेट बैठक के दौरान भी भारी हंगामा हुआ. जुलाई 2025 में यूजी नामांकन में अवैध वसूली का विरोध करते हुए छात्रों ने विवि प्रशासन को बैकफुट पर ला दिया. 19 जून 2025 को हंगामे के कारण पैट 2023 का इंटरव्यू स्थगित करना पड़ गया. 20 मई 2025 को पैट मामले को लेकर कपड़े उतारकर छात्र नेता वीसी चैंबर पर ही धरने पर बैठ गए. 21 मार्च 2025 को छात्रों के हंगामे के बीच तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रो. ए के पांडेय बेहोश हो गये थे. इन सभी वाकयों के बाद पुलिस की मदद लेना और कानूनी कार्रवाई करने को विवि प्रशासन या पीड़ित पक्ष बाध्य हुआ. हालांकि इन कार्रवाइयों के बाद भी गतिरोध और आंदोलन बदस्तूर जारी हैं. यह बात दीगर है कि समस्याओं को लेकर छात्रों के सब्र की लंबी परीक्षा ले जाती है. अधिकांश पदाधिकारी स्थिति बिगड़ने पर वीसी की ओर मामले को मोड़कर चुप बैठ जाते हैं. आखिरकार कुलपति को ही सारी स्थिति का सीधे सामना करना पड़ता है. बीते 18 मार्च को विवि कार्य से वीसी पटना में थे. उस दिन विवि स्थापना दिवस समारोह निर्धारित था. वीसी ने स्पष्ट किया था कि उसी दिन सारा कार्य संपन्न कर पटना से लौटकर कार्यक्रम में शामिल होना व्यवहारिक जान नहीं पड़ता है. इसलिए वीसी की अनुपस्थिति में ही कार्यक्रम कर लिया जाये. मगर अधीनस्थ पदाधिकारियों ने वीसी को लौटने के लिए तैयार कर लिया. वीसी के विवि लौटने से पहले ही हंगामा शुरू हो गया था. सीनेट हॉल कार्यक्रम स्थल को छोड़कर अधिकांश पदाधिकारी, छात्र बाहर आ गये थे. इस दौरान छात्र नेताओं को समझाने-बुझाने का खासकर अनुशासन कार्य से जुड़े अधीनस्थ पदाधिकारियों ने कोई खास प्रयास नहीं किया और वीसी के आने का इंतजार करते रहे. नतीजा यह हुआ कि पटना की दौड़भाग करने के बाद भी पूर्णिया लौटकर वीसी को ही हंगामे का सामना करना पड़ा. ना चाहते हुए भी कार्यक्रम शुरू करने को हां कहना पड़ा. इसके बाद जिस तरह से स्थापना दिवस समारोह का उदघाटन हुआ उसकी टीस सीनेट हॉल में मौजूद हर किसी को आजीवन सालती रहेगी.
छह साल से छात्र संघ चुनाव को टालना पूर्णिया विवि को पड़ रहा महंगा
पिछले एक साल में छात्रों के हंगामे के आधा दर्जन वाकयों में टूटी मर्यादाएं
