दिल्ली के नेशनल क्राफ्ट म्यूजियम में पूर्णिया आर्ट एंड पूर्णिया क्राफ्ट के उत्पादों की धूम

भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय व वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से देश भर से 30 से ज्यादा स्फूर्ति के क्लस्टर के कारीगरों द्वारा तैयार किये गये उत्पादों की प्रदर्शनी में पूर्णिया जिले की विशेष ‘पूर्णिया आर्ट एंड पूर्णिया क्राफ्ट’ के उत्पादों की धूम मची है.

पूरे देश से करीब 30 सर्वश्रेष्ठ क्लस्टर के उत्पादों को किया गया है शामिल, प्रतिनिधि, पूर्णिया. भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय व वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से देश भर से 30 से ज्यादा स्फूर्ति के क्लस्टर के कारीगरों द्वारा तैयार किये गये उत्पादों की प्रदर्शनी में पूर्णिया जिले की विशेष ‘पूर्णिया आर्ट एंड पूर्णिया क्राफ्ट’ के उत्पादों की धूम मची है. कारीगर गाथा देश के कारीगरों की विरासत नाम से दिल्ली के नेशनल क्राफ्ट म्यूजियम, प्रगति मैदान में चलने वाले इस दस दिवसीय प्रदर्शनी का उद्घाटन गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री और उत्तरप्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने किया. उन्हें पूर्णिया शिल्प में बनी स्वामी विवेकानंद मोमेंटो, बिनोद आशीष और गुल्लू दा ने संयुक्त रूप से देकर आर्ट और क्राफ्ट के क्षेत्र में पूर्णिया की समृद्ध विरासत के बारे में विस्तार से बताया.

गौरतलब है कि भारत सरकार ने विलुप्त हो रही पूर्णिया आर्ट और क्राफ्ट व इससे जुड़े कारीगरों को एक मंच प्रदान करने हेतु देश का सबसे बड़ा जुट व बनाना फाइबर की स्थापना शहर के उफरैल में 2021 में किया जिसको चलाने की जिम्मेदारी पूर्णिया निवासी प्रख्यात कलाकार किशोर कुमार राय उर्फ गुलू दा के ऊपर है. जिससे एक हजार से ज्यादा महिला कारीगर जुडी हुई है.

प्रदर्शनी में पूर्णिया आर्ट और क्राफ्ट के पचास से ज्यादा उत्पाद

भारत सरकार द्वारा विभिन्न राज्यों के प्रसिद्ध शिल्प व कला को पुनर्स्थापित करने के लिए स्फूर्ति योजना के तहत पचास से ज्यादा क्लस्टर की स्थापना की गयी है जिसमें से करीब 30 सर्वश्रेष्ठ क्लस्टर के कारीगरों के द्वारा तैयार किये गये उत्पादों की प्रदर्शनी का वृहत आयोजन दिल्ली के नेशनल क्राफ्ट म्यूजियम में किया गया है. जिसमें करीब 100 से ज्यादा तरह के उत्पाद को प्रदर्शित किया गया है. सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस मेले में सिर्फ पूर्णिया आर्ट और क्राफ्ट के पचास से ज्यादा उत्पादों को रखा गया है.

कला संरक्षण के साथ-साथ कारीगरों की आर्थिक उन्नति का लक्ष्य

वस्त्र मंत्रालय के अधीन मुख्य नोडल संस्था राष्ट्रीय हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट डेवलेपमेंट काउंसिल के द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी के आयोजन में मुख्य भूमिका निभाने वाले काउंसिल के तकनीकी सलाहकार मोहम्मद फजल ने बताया कि कारीगरों की एक समृद्ध विरासत के माध्यम से देश भर के कारीगरों को एक मंच प्रदान करना हमारा मुख्य उद्देश्य है ताकि देश की विलुप्त हो रही कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके साथ ही आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के तहत कारीगरों की आर्थिक उन्नति सुनिश्चित की जा सके.

पारंपरिक कारीगरी की मिसाल

क्लस्टर के निदेशक गुलू दा ने बताया कि जुट व बनाना फाइबर से बनी वस्तुएं न केवल पारंपरिक कारीगरी की मिसाल हैं, बल्कि यह हमारे स्थानीय शिल्पकारों की मेहनत और रचनात्मकता का भी प्रतीक हैं. प्रदर्शनी में विभिन्न प्रकार के जुट से बने उत्पाद जैसे बैग पूर्णिया शिल्प और पूर्णिया चित्र की सजावटी वस्तुएं और अन्य उपयोगी चीजें देखने को मिल रही हैं. यह अवसर हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और स्थानीय कारीगरों का समर्थन करने का एक शानदार तरीका प्रदान करता है.

कला को संरक्षित और बढ़ावा देने का प्रयास

इस अभियान के सूत्रधार समाजसेवी बिनोद आशीष ने बताया कि हम सभी को अपनी इस विरासत और अपनी इस अनमोल कला को संरक्षित और बढ़ावा देने का प्रयास करना चाहिए. उन्होंने जिले के लोगों से दिल्ली के प्रगति मैदान में आकर इस प्रदर्शनी में जिले की विशेष ”पूर्णिया आर्ट एंड पूर्णिया क्राफ्ट” को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में सहयोग देने की अपील की है.

फोटो -13 पूर्णिया 15- राज्यपाल को स्वामी विवेकानंद का प्रतीक चिह्न प्रदान करते बिनोद आशीष और गुल्लू दा

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By Prabhat Khabar News Desk

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