पूर्णिया. संस्कार भारती पूर्णिया द्वारा आयोजित 6 दिवसीय कार्यशाला में संगीत एवं नृत्य के माध्यम से जिला पर्यवेक्षण गृह के बच्चों को राष्ट्रवाद एवं राष्ट्रप्रेम का पाठ पढ़ाया गया. यह कार्यशाला 18 मई से 23 मई तक आयोजित की गयी. इसमें बच्चों को सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया गया.कार्यशाला के समापन अवसर पर बच्चों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से उपस्थित अतिथियों का मन मोह लिया. इस 6 दिवसीय आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज से भटके हुए बच्चों को संगीत और नृत्य के माध्यम से राष्ट्रीय भावना से जोड़ना तथा उन्हें समाज की मुख्य धारा में वापस लाने के लिए प्रेरित करना है. कार्यक्रम की शुरुआत संस्कार भारती पूर्णिया के कलाकारों द्वारा नृत्य की प्रस्तुति से हुई,उसके बाद बच्चों के द्वार कार्यशाला में सीखे हुए नृत्य और गीतों की प्रस्तुति हुई जिसमें शास्त्रीय नृत्य शैली भरतनाट्यम में ‘गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु’ गुरु वंदना के साथ हुई. इसके बाद बच्चों ने विभिन्न मुद्राओं का प्रदर्शन किया, जिसका प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान सूरज साहनी द्वारा दिया गया था.शास्त्रीय प्रस्तुतियों के पश्चात बच्चों ने बिहार की विलुप्त होती लोक नृत्य परंपरा ‘पमरिया ’ का मनमोहक प्रदर्शन किया. इस लोक नृत्य का प्रशिक्षण बिहार कला सम्मान से सम्मानित लोक नृत्य गुरु अमित कुमार द्वारा दिया गया.इसके अतिरिक्त, कुमारी चांदनी शुक्ला ने बच्चों को देशभक्ति एवं लोकगीतों का प्रशिक्षण दिया. इन गीतों के माध्यम से बच्चों में राष्ट्रप्रेम, समर्पण और स्वदेशी भावना को जागृत करने का सफल प्रयास किया गया. कार्यक्रम मे अतिथि के रूप में प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट चंदन कुमार ठाकुर, संस्कार भारती पूर्णिया इकाई कि अध्यक्ष पल्लवी मिश्रा, शिक्षण मंडल उत्तर बिहार के प्रभारी संजय कुमार सिंह, संगीत शिक्षक विजय कुमार दास, लोग गायिका श्रुति,किशन कुमार, नयन और राजदीप उपस्थित थे.
संगीत एवं नृत्य के माध्यम से पर्यवेक्षण गृह के बच्चों को पढ़ाया गया राष्ट्रवाद का पाठ
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