प्रतिनिधि, बनमनखी/जानकीनगर. आगामी तीन मार्च को भगवान नरसिंह अवतार स्थल भक्त प्रह्लाद स्तम्भ सिकलीगढ़ धरहरा में राजकीय होलिका महोत्सव में होलिका जलायी जाएगी तथा अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुरुआत होगी.राजकीय होलिका महोत्सव कार्यक्रम समारोह में महज दस दिन शेष बच गए हैं. राजकीय होलिका महोत्सव देखने लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे.चालीस फीट होलिका का निर्माण युद्धस्तर पर किया जा रहा है.आगामी तीन मार्च को शाम 6.45 बजे होलिका जलायी जाएगी.तथा कार्यक्रम समारोह में बालीवुड के गायक बिनोद राठौर एवं चांदनी मुखर्जी समां बांधेंगे.बतातें चलें कि बनमनखी के उत्तरी भाग में अवस्थित सिकलीगढ़ धरहारा प्राचीन गरिमा पूर्ण सभ्यता और संस्कृति का परिचायक है.इस सिकलीगढ़ धरहारा का इतिहास ढाई हजार वर्ष पुराना है.किवदंतियों के अनुसार राजा हिरण्यकश्यप का वध यहीं हुआ था.यहां एक किला भी है.इस गढ़ का प्रत्येक भाग लगभग 25 फीट ऊंचा और 700 फीट लंबा है.60 वर्ष पूर्व कुछ समय तक खुदाई के बाद काम ठप कर दिया गया. फलत:इसकी पौराणिक गढ़ की सच्चाई इसके गर्व में ही छिपी रह गयी. सिकलीगढ़ भगवान नरसिंह का अवतार स्थल है.अभी भी यहां मानिक धाम अवस्थित है.जहां जमीन से 8 फीट ऊंचा और 10 फीट मोटा गेंहुआ रंग का एक पत्थर का स्तम्भ मौजूद है. यह वही स्थान है जहां भगवान विष्णु ने प्रकट होकर अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी.श्रद्धालुओं के अनुसार प्रहलाद स्थान के ऊपर बीच में एक चित्र था. इसमें पत्थर लकड़ी का टूकडा भी डालने पर क्षण पश्चात पानी में गिरने जैसी आवाज होती थी और पास में ही युवा हिरण नदी में वह लकड़ी का टुकडा देखने को मिलता था. वर्तमान में प्रह्लाद स्थान पर स्तम्भ है. कहा जाता है कि अंग्रेजों ने किन्हीं कारणों से कई हाथियों व घोड़े की सहायता से उखाड़ने का प्रयास किया था.यह स्तम्भ उखड़ा तो नहीं झुक अवश्य गया. बुजुर्गों का मानना है कि इस स्तम्भ की मोटाई में क्रमशः वृद्धि होती रही है.यहां के सिद्ध पुरुष बिहार सहित संपूर्ण भारत के अलावा विदेशों में भी अपनी ख्याति अर्जित की.भक्त प्रह्लाद का गुरूकुल भी इसी जगह पर अवस्थित है. देश-विदेश के हजारों पर्यटक प्रतिवर्ष पर्यटन के लिए बनमनखी आते हैं. पर्यटक पूर्णिया या सहरसा में ठहरते हैं.
भगवान नरसिंह स्थल पर तीन मार्च को होलिका महोत्सव
बनमनखी/जानकीनगर
