20 साल से 'मौत का फंदा' बनी झूल रही हाईमास्ट लाइट को प्रशासन ने उतारा, ढाई घंटे तक ठप रहा ठाकुरबाड़ी चौक मार्ग

Thakurbari Chowk: पूर्णिया के जलालगढ़ मुख्यालय बाजार के हृदयस्थली कहे जाने वाले ठाकुरबाड़ी चौक पर पिछले कई महीनों से एक पतले तार के सहारे हवा में झूल रही विशालकाय हाईमास्ट लाइट को आखिरकार प्रशासन ने सुरक्षित उतार लिया है. इस हाई-वोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर बाजार का मुख्य मार्ग ढाई घंटे तक पूरी तरह बंद रहा.

Thakurbari Chowk: पूर्णिया के जलालगढ़ से निकेश राय की रिपोर्ट: पूर्णिया जिले के जलालगढ़ मुख्यालय बाजार में किसी बड़े हादसे को दावत दे रही 40 मीटर ऊंची हाईमास्ट लाइट और उसके भारी-भरकम खंभे (पोल) को जिला प्रशासन के निर्देश पर सुरक्षित रूप से नीचे उतार लिया गया है. ठाकुरबाड़ी चौक पर राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों के लिए लंबे समय से गंभीर खतरा बने इस पोल को हटाने की जानकारी देते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) ममता कुमारी ने बताया कि तकनीकी खराबी के कारण यह लाइट बेहद खतरनाक स्थिति में लटकी हुई थी, जिसे मंगलवार (26 मई 2026) को भारी मशीनों की मदद से क्रेन द्वारा हटा दिया गया.

सिर्फ एक तार के भरोसे 40 मीटर ऊपर लटकी थी ‘आफत’

बीडीओ ममता कुमारी ने बताया कि करीब 20 वर्ष पूर्व ठाकुरबाड़ी चौक पर इस विशाल हाईमास्ट लाइट को स्थापित किया गया था. समय बीतने के साथ इसके रखरखाव के अभाव में पोल के ऊपरी हिस्से के दो मजबूत सपोर्टिंग वायर (लोहे के तार) पूरी तरह कट चुके थे. यह भारी-भरकम लाइट जमीन से करीब 40 मीटर ऊपर महज एक आखिरी बचे हुए तार के सहारे हवा में झूल रही थी.

तेज आंधी या तूफान आने पर इसके सीधे व्यस्त बाजार और दुकानों पर गिरने की पूरी आशंका थी. इस भीषण खतरे को देखते हुए प्रशासन ने त्वरित एक्शन लिया. पहले हाइड्रोलिक क्रेन की मदद से लाइट को सुरक्षित नीचे लाया गया और फिर हाइड्रा मशीन लगाकर पूरे लोहे के पोल को जड़ से उखाड़कर हटाया गया.

तत्कालीन विधायक प्रदीप दास ने लगवाई थी लाइट, 15 साल से थी खराब

स्थानीय बुजुर्गों और व्यापारियों ने बताया कि करीब दो दशक (20 वर्ष) पहले जलालगढ़ के तत्कालीन विधायक प्रदीप कुमार दास के ऐच्छिक कोष से इस 40 मीटर ऊंची चमचमाती हाईमास्ट लाइट को चौक की रौनक बढ़ाने के लिए लगवाया गया था. शुरुआत के 5 से 6 वर्षों तक इस लाइट ने पूरे बाजार को रोशनी से सराबोर रखा और समय-समय पर इसकी आंशिक मरम्मत भी की गई.

लेकिन इसके बाद विभागीय उदासीनता के कारण यह सरकारी लाइट बंद हो गई और धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों में दफन हो गई. पिछले 15 वर्षों से पूरी तरह कबाड़ और खराब हो चुकी इस लाइट को हटाने के साथ ही ठाकुरबाड़ी चौक की एक पुरानी पहचान हमेशा के लिए समाप्त हो गई.

ढाई घंटे तक रूट रहा डायवर्ट, मौके पर डटे रहे अधिकारी

इस बेहद पेचीदा और जोखिम भरे रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा करने में प्रशासनिक टीम को करीब ढाई घंटे का कड़ा समय लगा. चूंकि पोल काफी ऊंचा और व्यस्त सड़क के बीच था, इसलिए सुरक्षा के दृष्टिकोण से मुख्यालय बाजार के मुख्य सड़क मार्ग पर बैरिकेडिंग कर आवागमन को पूरी तरह अवरुद्ध (रूट डायवर्ट) कर दिया गया था.

इस सफल और सुरक्षित ऑपरेशन के दौरान मौके पर बीडीओ ममता कुमारी के साथ प्रखंड सांख्यिकीय पदाधिकारी देवेश भारद्वाज, जलालगढ़ थाना के पुलिस अवर निरीक्षक (पुअनि) राजेश्वर राम, स्थानीय प्रबुद्ध नागरिक प्रमोद मिश्रा, मोहम्मद फिरोज सहित भारी संख्या में पुलिस बल और तकनीकी टीम मौजूद रही. खंभा हटने के बाद स्थानीय दुकानदारों ने राहत की सांस ली है.

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Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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