कुपोषित बच्चों के पोषण व पुनर्वास को ले स्वास्थ्य अधिकारियों ने की समीक्षा बैठक

कुपोषित बच्चों के पोषण व पुनर्वास को ले

पूर्णिया. नवजात कुपोषित बच्चों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुरू से ही पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) भेजा जाता है जहां उपचार के दौरान बच्चों और परिजनों को आवश्यक पोषण और चिकित्सकीय सहायता के साथ साथ कुछ सहयोग राशि भी उपलब्ध कराई जाती है. इसी क्रम में कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजने के लिए सभी प्रखंड के प्रखंड स्वास्थ्य अधिकारी और समेकित बाल विकास परियोजना (आईसीडीएस) के सीडीपीओ के साथ एक दिवसीय समीक्षा बैठक का आयोजन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में किया गया. इस दौरान सभी प्रखंड अधिकारियों को कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान करते हुए उन्हें परिजनों के साथ पोषण पुनर्वास केन्द्र भेजने की जानकारी दी गई. पोषण पुनर्वास केंद्र में कुपोषित बच्चों को सुरक्षित करने के लिए शिशु स्वास्थ्य अधिकारी और पोषण सलाहकार द्वारा आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है. जिसका लाभ उठाते हुए कुपोषित बच्चों को समय के साथ स्वस्थ और तंदुरुस्त किया जाता है. पोषण पुनर्वास केंद्र का किया गया निरीक्षण समीक्षा बैठक के बाद सभी प्रखंड स्वास्थ्य अधिकारियों और आईसीडीएस सीडीपीओ द्वारा कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने के लिए जीएमसीएच में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण किया गया. सभी अधिकारियों को जानकारी दी गयी कि कुपोषित बच्चों के लिए एनआरसी में 20 बेड का वार्ड उपलब्ध है. संबंधित वार्ड में कुपोषित बच्चों और उनके एक परिजन के रुकने और खाने के साथ साथ बच्चों के आनंद के लिए खिलौना सुविधा भी उपलब्ध है. प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. आरपी मण्डल ने कुपोषित बच्चों की पहचान करते हुए एनआरसी भेजते हुए आवश्यक चिकित्सकीय सहायता का लाभ उठाने के लिए जागरूक करने का निर्देश दिया. अतिकुपोषित बच्चों की मृत्यु का खतरा नौ गुना अधिक जिला कार्यक्रम समन्यवक सह पोषण पुनर्वास केन्द्र के नोडल पदाधिकारी डॉ सुधांशु शेखर ने बताया कि सामान्य बच्चों की तुलना में गंभीर अतिकुपोषित बच्चों की मृत्यु का खतरा नौ गुना अधिक है. 100 में 80-85 प्रतिशत ऐसे कुपोषित बच्चे पाए जाते हैं जिनका चिकित्सीय सहायता समुदाय स्तर पर किया जा सकता है. 10-15 प्रतिशत बच्चों को ही पोषण पुनर्वास केंद्र भेजने की जरूरत होती है. ऐसे बच्चों की समय से पहचान कर उनका इलाज करने से कुपोषण के कारण होने वाले बच्चों की मृत्यु को खत्म किया जा सकता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Sanjit shukla

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >