पीएम आवास योजना में धांधली पर संसद में सरकार को घेरा

पप्पू यादव ने संसद में मांगा जवाब

पूर्णिया. प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर गुरुवार को लोकसभा में पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने एक अतारांकित प्रश्न के माध्यम से केंद्र सरकार को घेरा. उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई-जी) के तहत लाभार्थियों के चयन में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और पारदर्शिता की कमी जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया और सरकार से इसका जवाब मांगा. उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में लाभार्थियों के चयन में व्यापक स्तर पर रिश्वत और कमीशन की मांग की जा रही है, जिससे गरीब और जरूरतमंद परिवार योजना के लाभ से वंचित रह जाते हैं. उन्होंने कहा कि यह स्थिति देश के गरीब वर्गों के साथ अन्याय है और सरकार को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. सांसद के प्रश्न पर ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ चंद्रशेखर पेम्मासानी ने लोकसभा में जवाब देते हुए स्वीकार किया कि अप्रैल 2016 से लेकर जुलाई 2025 तक पीएमएवाई-जी से संबंधित 2,486 शिकायतें मंत्रालय के सीपीजीआरएएमएस पोर्टल के माध्यम से प्राप्त हुई हैं. ये शिकायतें अनियमितताओं और निधियों के दुरुपयोग से जुड़ी हैं. सरकार ने बताया कि ग्राम पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक शिकायत निवारण तंत्र की व्यवस्था की गयी है और हर स्तर पर एक अधिकारी को नामित किया गया है, जो शिकायतों के निबटारे के लिए 15 दिनों के भीतर कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होता है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद पप्पू यादव ने कहा कि केवल तंत्र स्थापित करना पर्याप्त नहीं है, जब तक उस तंत्र का निष्पक्ष और प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होता. उन्होंने कहा कि पीएमएवाई जैसी योजना, जो देश के गरीबों को छत देने के लिए बनायी गयी थी, वह आज कमीशनखोरी और दलाली का अड्डा बन चुकी है. कई जिलों में लाभार्थियों को आवास के नाम पर 10,000 से 20,000 तक की रिश्वत देनी पड़ रही है. उन्होंने कहा कि यह आवश्यक है कि डिजिटल तकनीक और सामाजिक निगरानी के माध्यम से योजना के क्रियान्वयन को पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाये. फोटो. 7 पूर्णिया 39- सांसद पप्पू यादव.

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