प्राचीन व दुर्लभ पांडुलिपियां के सरंक्षण की प्रशासनिक पहल सराहनीय

पूर्णिया

पूर्णिया. जिला प्रशासन की ओर से साहित्य एवं संस्कृति के हित में प्राचीन और दुर्लभ पांडुलिपियां का डिजिटलाइजेशन कर संरक्षित करने की दिशा में जो पहल की है, उसका प्रबुद्धजनों ने स्वागत किया है. प्रबुद्धजनों का मानना है कि विश्व प्राचीन अनेक पांडुलिपियां पूर्णिया की स्मृति के गर्भगृह में आज भी समायी हुई है. उसकी खोज आवश्यक है, जो पूर्णिया वासियों के सहयोग के बिना संभव नहीं है .इसलिए पांडुलिपि संरक्षण समिति के गठन का सुझाव समीचीन है. बिहार प्रांतीय स्नातक क्लब के संयोजक सह मानवाधिकार प्रतिनिधि अशोक कुमार आलोक ने जिला प्रशासन से अपील की है कि इस महनीय कार्य के लिए विद्वानों ,साहित्यकारों एवं बुद्धिजीवियों की एक कमेटी बनाकर उनसे सहयोग लेना इस दिशा में लाभकारी होगा. डा गजाधर यादव, अशोक कुमार आलोक ,महेश विद्रोही, डा चन्दन कुमार सिंह, प्रोफेसर डॉ प्रणव कुमार, प्रोफेसर किशोर कुमार, प्रोफेसर ज्ञानदीप गौतम, प्रो.अनिल मेहता,डा कृष्ण देव यादव डा कौशल कुमार सुबोल प्रसाद सिंह , सुमंत कुमार ,योगेंद्र विद्यार्थी, महेश प्रसाद साह आदि बुद्धिजीवियों ने प्रशासन के इस निर्णय की सराहना की है. प्रोफेसर डा.गजाधर यादव ने बताया कि बिहार का प्रेमचंद के रूप में ख्यात महान उपन्यासकार साहित्य रत्न अनूप लाल मंडल के कुल तेरह उपन्यास विगत पचास वर्षों से दुर्लभ और अनुपलब्ध थे. उनकी फोटो प्रतियां कुछ लोगों के पास थी. ऐसी जीर्ण-शीर्ण प्रतियों को अर्य संदेश पत्रिका के संपादक अशोक कुमार आलोक ने उपलब्ध कराकर नई दिल्ली से प्रकाशित कराया और डा गजाधर यादव के संपादन में अनूप विशेषांक भी निकाला जो साहित्य एवं संस्कृति के हित में महान कार्य है.

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