पूर्णिया : पूर्णिया शहर के लाइन बाजार स्थित महामाया मंदिर की पहचान अपनी अनूठी परंपरा के लिए है. इस मंदिर में देवी महामाया की मूर्ति नहीं, बल्कि पिंडी स्वरूप की पूजा की जाती है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता यहां साक्षात पिंडी रूप में विराजमान हैं और सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं. यही वजह है कि हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं.
सबसे पहले होती है माता की पिंडी की पूजा
महामाया मंदिर परिसर में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश, राधा-कृष्ण, भगवान हनुमान और मां दुर्गा की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं. इसके बावजूद मंदिर में आने वाले श्रद्धालु सबसे पहले माता महामाया की पिंडी का दर्शन और पूजन करते हैं. विशेष रूप से महिलाओं की संख्या यहां अधिक रहती है. मन्नत पूरी होने की कामना से श्रद्धालु विधि-विधान के साथ माता की पूजा करते हैं.
66 वर्ष पुराना है मंदिर का इतिहास
लाइन बाजार स्थित महामाया मंदिर का इतिहास करीब 66 वर्ष पुराना माना जाता है. स्थानीय जानकारों के अनुसार वर्ष 1960 में माता महामाया की पिंडी की प्रतिष्ठापना की गई थी. उस समय मंदिर फूस-खपरैल का बना हुआ था. मंदिर के निर्माण और प्रतिष्ठापना में जगन्नाथ साह, दुर्गा प्रसाद साह, शिवचंद्र लाल आर्य और रघुनाथ साह सहित कई स्थानीय लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
आज भव्य आस्था केंद्र के रूप में पहचान
समय के साथ मंदिर का विस्तार होता गया और आज यह एक भव्य धार्मिक स्थल के रूप में स्थापित हो चुका है. यहां प्रतिदिन सुबह और शाम नियमित पूजा-अर्चना होती है. नवरात्र सहित अन्य धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि महामाया मंदिर केवल पूजा का स्थल नहीं, बल्कि शहर की आस्था और धार्मिक परंपरा का प्रमुख केंद्र भी है.
