पूर्णिया से सत्येन्द्र सिन्हा गोपी की रिपोर्ट
GMCH Purnea : पूर्णिया के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (GMCH) में नवजात शिशुओं की मृत्यु दर कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है. अस्पताल प्रशासन जन्म के समय शिशुओं को समय पर और प्रभावी पुनर्जीवन (Resuscitation) सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दे रहा है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जन्म के तुरंत बाद सांस लेने में कठिनाई का सामना करने वाले नवजातों को वैज्ञानिक तरीके से उपचार मिल सके और उनकी जान बचाई जा सके.
क्यों महत्वपूर्ण हैं जन्म के बाद के शुरुआती मिनट?
विशेषज्ञों के अनुसार जन्म के बाद के शुरुआती कुछ मिनट नवजात के जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. भारत में नवजात मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक जन्म के समय शिशु का स्वयं सांस शुरू नहीं कर पाना है. यदि ऐसे बच्चों को समय पर सही सहायता मिल जाए तो बड़ी संख्या में मौतों को रोका जा सकता है.
जीएमसीएच पूर्णिया में इस दिशा में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित कर नवजात देखभाल सेवाओं को मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है. अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि प्रसव के समय उपलब्ध स्वास्थ्यकर्मियों की दक्षता बढ़ने से नवजात मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है.
वैज्ञानिक तकनीक से मिलेगी जीवन की नई शुरुआत
जीएमसीएच के चिकित्सक डॉ. प्रेम प्रकाश ने बताया कि नवजात शिशुओं को जन्म के समय सांस दिलाने की सरल और वैज्ञानिक तकनीकें उनके जीवन को बचाने में बेहद प्रभावी साबित होती हैं. उन्होंने कहा कि देशभर में चल रहा यह अभियान नवजात पुनर्जीवन से जुड़े कौशल को स्वास्थ्यकर्मियों तक पहुंचाने का एक बड़ा प्रयास है.
डॉ. प्रेम प्रकाश के अनुसार यह देश के सबसे बड़े समन्वित प्रशिक्षण अभियानों में शामिल है, जिसमें बड़े स्तर पर कौशल आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. इससे प्रसव कक्ष में मौजूद चिकित्सा कर्मियों की क्षमता बढ़ेगी और आपात स्थिति में नवजातों को तुरंत सहायता मिल सकेगी.
गांवों तक पहुंचेगा अभियान का लाभ
उन्होंने बताया कि इस अभियान की योजना, समन्वय, मानकीकरण और क्रियान्वयन में National Neonatology Forum India की महत्वपूर्ण भूमिका है. कार्यक्रम का दायरा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक भी इसका विस्तार किया जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि नवजात देखभाल को मजबूत बनाने वाला यह समावेशी अभियान आने वाले समय में शिशु मृत्यु दर कम करने में अहम भूमिका निभाएगा. इससे अस्पतालों के साथ-साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी नवजातों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
Also Read: बोधगया भ्रमण के बाद वापस लौटे म्यांमार के राष्ट्रपति, विशेष विमान से दिल्ली के लिए हुए रवाना
