साहित्यिक समारोह में किसान हित में प्रेमचंद की लेखन विधा पर फोकस

साहित्यकार, उपन्यासकार शब्द शिल्प के जादूगर मुंशी प्रेमचंद का जयंती पखवाड़ा के अवसर पर प्रेमचंद की लेखन विधा और साहित्य में योगदान पर चर्चा हुई.

पूर्णिया. बुजुर्ग समाज, साहित्यांगन एवं चटक धाम के संयुक्त तत्वावधान में भारत स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षण भवन में देश के जाने माने साहित्यकार, उपन्यासकार शब्द शिल्प के जादूगर मुंशी प्रेमचंद का जयंती पखवाड़ा के अवसर पर प्रेमचंद की लेखन विधा और साहित्य में योगदान पर चर्चा हुई. इस दौरान किसान हित में प्रेमचंद साहित्य की विशेषताएं फोकस में रहीं. इस मौके पर आयोजित समारोह की अध्यक्षता बी एन मंडल विवि मधेपुरा के लोकपाल डॉ प्रो शिव मुनि यादव ने की जबकि बुजुर्ग समाज के अध्यक्ष नित्यानंद कुंवर ने उद्घाटन किया. मुख्य वक्ता के रूप में पूर्णिया विश्व विद्यालय के हिन्दी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ प्रो सुरेश मंडल मौजूद थे. साहित्यांगन के सचिव डॉ राम नरेश भक्त ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि प्रेमचंद ने सभी वर्गों की अपेक्षा किसानों के चित्रण में सर्वाधिक सफलता पाई है. उनका गोदान भारतीय किसान जीवन का ब्लू प्रिंट है. मुख्य वक्ता के रूप में डॉ प्रो सुरेश प्रसाद मंडल ने कहा कि प्रेमचंद भारतीय साहित्य में पहले लेखक थे जिन्होंने जमींदारी प्रथा को समाप्त करने की बात कही और यह प्रश्न उठाया कि किसान और सरकार के बीच यह तीसरा वर्ग क्यों है, अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ प्रो शिव मुनि यादव ने कहा कि प्रेमचंद को किसानों से गहरा लगाव था जिसे किसान को अपने खेतों के प्रति और मां-बाप को अपने बच्चों के प्रति होता है. राष्ट्रपति पुरस्कार से विभूषित संजय कुमार सिंह ने कहा कि प्रेमचंद हर तरह के किसानों को पहचानते थे. उनके विभिन्न आर्थिक स्तर, उनकी विभिन्न विचार धाराएँ, उनकी विभिन्न सामाजिक समस्याएं तथा किसान जीवन के हर कोने से परिचित थे. बीएनसी कॉलेज धमदाहा के पूर्व प्रधानाचार्य प्रो गिरीश कुमार सिंह ने अपनी ओर से प्रेमचंद को नमन करते हुए कहा कि प्रेमचंद ने जमींदारी को सुरक्षा देने के प्रश्न पर तात्कालिक सरकार की आलोचना की. वे अकेले ऐसे बुद्धिजीवी लेखक थे जिन्होंने किसान जीवन की सूक्ष्म समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करके लिखा और लोगों तथा सरकार का ध्यान आकृष्ट किया. डॉ के के चौधरी ने कहा कि प्रेमचंद किसानों के हित के लिए नये नये उपाय सोचने में लगे थे ताकि इस वर्ग का उद्धार हो सके. आज आजाद भारत में भी प्रेमचंद के प्रिय किसान छोटे-छोटे सुख सुविधा के लिए मोहताज हैं. विशिष्ट वक्ताओं में युवा कवि गोविंद जी, मिथिलेश राय, पवन जायसवाल तथा अन्य ने भी अपने उद्गार व्यक्त किये.

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