महिला कांस्टेबल के प्यार में टूटा डेटा ऑपरेटर का दिल, आखिरी कॉल के इंतजार में खत्म कर ली जिंदगी!

Bihar Suicide News: पूर्णिया के सरसी थाना में तैनात डेटा ऑपरेटर ललित कुमार की संदिग्ध मौत आत्महत्या का मामला लग रहा है. पुलिस जांच में सामने आए डिजिटल साक्ष्य, कॉल डिटेल्स और मैसेज इस ओर इशारा कर रहे हैं कि ललित एकतरफा प्यार में भावनात्मक रूप से टूट चुका था और पहले से सुसाइड की तैयारी कर रहा था.

Bihar Suicide News: बिहार के पूर्णिया जिले के सरसी थाना में तैनात डेटा ऑपरेटर ललित कुमार दास (उम्र 26) की रहस्यमयी मौत अब धीरे-धीरे सुसाइड की गुत्थी की ओर बढ़ रही है. 30 मई की रात संदिग्ध हालात में कोसी प्रोजेक्ट कॉलोनी के एक कमरे में उसका शव फंदे से लटका मिला था. शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन जिस तरह से मामला भावनात्मक धोखे, तकनीकी साक्ष्यों और राजनीतिक दबाव के बीच उलझा है, उसने इस केस को बेहद संवेदनशील बना दिया है.

एकतरफा प्यार बना मौत की वजह!

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ललित सरसी थाना में तैनात एक महिला सिपाही से एकतरफा प्रेम करता था. शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत और हंसी-मजाक हुआ करता था, लेकिन ललित इसे प्यार समझ बैठा. जब महिला सिपाही को इस बात का आभास हुआ, तो उसने दूरी बनानी शुरू कर दी. इसी दौरान ललित को महिला सिपाही के अन्य तीन लड़कों से अफेयर की जानकारी मिली, जिसने उसे पूरी तरह तोड़ कर रख दिया.

आखिरी बार बात करना चाहता था ललित

मौत से पहले ललित ने उस महिला सिपाही को 10 बार कॉल किया और कई मैसेज भी भेजे. वह आखिरी बार उससे बात करना चाहता था, लेकिन उसे कोई जवाब नहीं मिला. करीब एक घंटे बाद जब महिला ने कॉल बैक किया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. अगले दिन जब ललित ड्यूटी पर नहीं आया और कॉल भी रिसीव नहीं हुआ, तो महिला सिपाही और एक अन्य सहयोगी उसके कमरे पर पहुंचे, जहां उसकी मौत की सूचना मिली.

मोबाइल की फ्लैश लाइट में की आत्महत्या

ललित का शव थाने से करीब 300 मीटर दूर कोसी कॉलोनी स्थित एक कमरे में फंदे से लटका मिला था. कमरे में बिजली नहीं थी, और अंधेरे में ललित ने अपने मोबाइल की फ्लैश लाइट ऑन कर फंदा लगाया. जब पुलिस शव को बरामद करने पहुंची, तब भी मोबाइल की फ्लैश ऑन थी, जो उसकी मानसिक स्थिति और आत्मघाती योजना की पुष्टि करता है.

आत्महत्या की तैयारी पहले से थी

पुलिस जांच में सामने आया कि ललित ने आत्महत्या से पहले यूट्यूब और गूगल पर दो दिनों तक सुसाइड से जुड़े वीडियो और जानकारी देखी थी. उसने 30 मई को ड्यूटी के बाद बाजार से प्लास्टिक की रस्सी खरीदी थी. दुकान की भी पहचान हो चुकी है जहां से उसने रस्सी खरीदी थी. ये सभी गतिविधियां आत्महत्या की पूर्व नियोजित योजना की तरफ इशारा करती हैं.

FSL रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्य

फॉरेंसिक टीम को ललित का मोबाइल मिला है जिसमें व्हाट्सएप चैट, टेक्स्ट मैसेज और कॉल रिकॉर्ड्स आत्महत्या की पुष्टि करते हैं. पुलिस जल्द ही ये सबूत ललित के परिजनों को दिखाने की तैयारी कर रही है. कुछ करीबी दोस्तों को ललित के प्रेम प्रसंग और मानसिक तनाव की जानकारी थी.

बढ़ता राजनीतिक दबाव

ललित की मौत पर राजनीतिक हलकों में भी हड़कंप मच गया है. निर्दलीय सांसद पप्पू यादव, मंत्री लेशी सिंह, पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा सहित कई नेताओं ने 72 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है. इसी दबाव में सरसी थानाध्यक्ष मनीष चंद्र यादव को पहले ही लाइन हाजिर किया जा चुका है.

हत्या की प्राथमिकी भी दर्ज

ललित के भाई के आवेदन पर थानाध्यक्ष मनीष चंद्र यादव और एसआई आयुष राज के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय शर्मा के अनुसार, एसआईटी इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है, और जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा.

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अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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