400 साल पुरानी विरासत संजोये हुए है पूर्णिया का चिमनी बाजार खानकाह

भारत सरकार के ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि संरक्षण कार्यक्रम के तहत सोमवार को जिला कला व संस्कृति पदाधिकारी पंकज कुमार पटेल ने खानकाह का भ्रमण कर यहां संरक्षित सैकड़ों दुर्लभ पांडुलिपियों का अवलोकन किया.

ज्ञान भारतम् मिशन के तहत हुआ सभी पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण पूर्णिया. भारत सरकार के ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि संरक्षण कार्यक्रम के तहत सोमवार को जिला कला व संस्कृति पदाधिकारी पंकज कुमार पटेल ने खानकाह का भ्रमण कर यहां संरक्षित सैकड़ों दुर्लभ पांडुलिपियों का अवलोकन किया. करीब चार सौ वर्ष पुरानी इस खानकाह में उर्दू, अरबी व फारसी भाषा की हस्तलिखित पांडुलिपियां सुरक्षित रखी गयी हैं, जो न केवल खानकाह के इतिहास बल्कि प्राचीन पूर्णिया की सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक विरासत को भी दर्शाती हैं. खानकाह के वर्तमान खादिम मौलाना नूर आलम व मौलाना कमाल ने प्रशासनिक टीम को पांडुलिपियों से अवगत कराया. निरीक्षण के दौरान ‘मक्तुबाते जमाली’, ‘गंजे अर्शदी’, ‘तारीखे बद्शाह’ व ‘रिसाला अत-ओ-नुजूम’ जैसी महत्वपूर्ण पांडुलिपियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं. वहीं हजरत बंदगी मुस्तफा उस्मानी के हस्तलिखित पत्रों का संग्रह भी प्रशासनिक अधिकारियों ने देखा.जिला कला व संस्कृति पदाधिकारी श्री पटेल ने कहा कि ज्ञान भारतम् मिशन देश की प्राचीन ज्ञान परंपरा और बौद्धिक धरोहर को संरक्षित व डिजिटलीकरण करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है. उन्होंने बताया कि खानकाह में संरक्षित सभी महत्वपूर्ण पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम् पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस ऐतिहासिक धरोहर से परिचित हो सकें. अरबी, फारसी व उर्दू पांडुलिपियों के अध्ययन व व्याख्या हेतु उर्दू अनुवादक वसीम अहमद अलीमी तथा सहायक उर्दू अनुवादक अब्दुल गनी भी मौजूद थे. निरीक्षण के बाद प्रशासनिक टीम ने चिमनी बाज़ार स्थित हजरत बंदगी मुस्तफा उस्मानी के मजार पर हाजिरी दी और ऐतिहासिक स्थल का निरीक्षण किया.

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Author: ARUN KUMAR

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