मुकदमा जीते सात साल बाद भी स्टेडियम व रंगभूमि के दाखिल-खारिज में पूर्णिया कॉलेज रहा लापरवाह

मुकदमा जीतने के सात साल बाद भी स्टेडियम और रंगभूमि के दाखिल-खारिज कराने में पूर्णिया कॉलेज ने घोर लापरवाही बरती है.

पूर्णिया. मुकदमा जीतने के सात साल बाद भी स्टेडियम और रंगभूमि के दाखिल-खारिज कराने में पूर्णिया कॉलेज ने घोर लापरवाही बरती है. इस दौरान तीन प्रधानाचार्य आये और गये पर इस दिशा में किसी ने भी कदम नहीं उठाये. वर्तमान प्रधानाचार्य प्रो सावित्री सिंह ने इस दिशा में पहल की है. प्रधानाचार्य की ओर से प्रो इस्तियाक अहमद ने एक पत्र एसडीओ को देकर इंदिरा गांधी स्टेडियम और रंगभूमि की जमीन पर पूर्णिया कॉलेज का हक जताया है. तत्कालीन प्रधानाचार्य प्रो संजीव कुमार ने इस मुकदमे को मुकाम तक पहुंचाया. तत्कालीन प्रधानाचार्य प्रो संजीव कुमार की सक्रियता के कारण न्यायालय का 18 नवंबर 2017 का आदेश पूर्णिया कॉलेज के पक्ष आया. इसके कुछ महीने बाद पूर्णिया विवि अस्तित्व में आ गया है. तत्कालीन विवि प्रशासन की नजर पूर्णिया कॉलेज की परिसंपदा पर पड़ गयी. इसमें बाधक बनने के कारण तत्कालीन प्रधानाचार्य प्रो संजीव कुमार बदल दिये गये. उसके बाद रंगभूमि, स्टेडियम एवं अन्य कॉलेज संपदा पर विवि प्रशासन का नियंत्रण हो गया. इसके बाद किसी भी प्रधानाचार्य ने इन संपदा की चर्चा करने से भी परहेज कर लिया, जबकि संपदा से प्राप्त आया विवि के कोष को समृद्ध करती रही. इस बीच तत्कालीन प्रधानाचार्य डॉ मुहम्मद कमाल ने जानकीनगर में कॉलेज की जमीन पर कवायद शुरू की. हालांकि उनके स्थानांतरण के बाद यह कवायद थम गयी. विवि बनाओ संघर्ष समिति के संस्थापक डॉ आलोक राज के ध्यानाकर्षण के बाद अब पूर्णिया कॉलेज के पत्रांक 148/25 दिनांक 8.8.2025 के तहत पूर्णिया सदर के एसडीओ को जमीन का ब्योरा दिया गया है. हालांकि दाखिल-खारिज कराने के लिए पूर्णिया कॉलेज को अपनी सक्रियता बनाये रखनी होगी. साथ ही पूर्णिया विवि को भी पूर्णिया कॉलेज की संपदा का मोह त्यागने की आवश्यकता है.

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