पूर्णिया. तीसरी कसम का मशहूर गीत ‘पान खाये सैंया हमारो’ आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में खास जगह रखता है. इस गीत को अपनी अनोखी शैली और चुलबुले अंदाज़ से अमर बनाया आशा भोसले ने. आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं लेकिन दशकों बाद भी यह गाना उतना ही ताजा लगता है, जितना अपने दौर में था. प्रख्यात गायिका आशा भोसले के निधन की खबर से न सिर्फ संगीत की दुनिया से जुड़े लोगों बल्कि लाखों श्रोताओं के बीच शोक की लहर है. यह अलग बात है कि आशा भोसले जी का आगमन पूर्णिया जनपद में शायद कभी नहीं हुआ लेकिन उनकी खनकती आवाज ने इस जिले की माटी से जुड़े महान कथाकार फणीश्वर नाथ रेणु जी द्वारा लिखित ‘मारे गये गुलफाम’ पर आधारित 60 के दशक में बनी हिंदी फिल्म तीसरी कसम के गानों में चार चांद लगा दिया. इस फिल्म के गीतों को लिखा था शैलेन्द्र और हसरत जयपुरी ने और संगीत शंकर जय किशन की जोड़ी का था. खासकर शैलेन्द्र का लिखा गाना जिसके बोल थे पान खाए सैंया हमारो… सांवली सुरतिया होंठ लाल-लाल, हाय हाय मलमल का कुर्ता-मलमल के कुरते पे छींट लाल लाल… इस गाने पर फिल्माये गये नृत्य को वहीदा रहमान ने जिस अदा से पेश किया था कि बरबस दर्शकों के मुंह से इश….की ध्वनि पूरे सिनेमा हॉल में सुनायी दे जाती थी. इसके अलावा लाली लाली डोलिया में लाली रे दुल्हिनियां गीत में आशा जी की आवाज़ ने गांव की पारम्परिकता को बखूबी दर्शाया. तीसरी कसम फिल्म के तीन गानों में आशा भोसले जी की आवाज थी – लाली लाली डोलिया में लाली रे दुल्हनियां, पान खाए सैंया हमारो और हाय गजब कहीं तारा टूटा. आज भी पूर्णिया के लोग इन गीतों से अपने आप को बेहद जुड़ा हुआ महसूस करते हैं. आज भले ही संगीत की दुनिया का यह चमकता सितारा टूटकर अन्तरिक्ष में कहीं गुम हो गया हो लेकिन इनकी आवाज सदैव संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करती रहेंगी.
‘पान खाये सैंया हमारो’...में हमेशा जिंदा रहेगी आशा भोसले की आवाज़
पूर्णिया
