अमौर में पांच महीने से राशन दुकान बंद: 10 किमी दूर जाने को मजबूर ग्रामीण

PDS Ration Shop Closed: पूर्णिया जिले के अमौर प्रखंड की डहुआबाड़ी पंचायत में सरकारी राशन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. पिछले पांच महीनों से स्थानीय जन वितरण प्रणाली (PDS) की दुकान बंद होने के कारण पांच हजार की आबादी दाने-दाने को मोहताज है और लोग मरिया नदी का चक्कर काटकर 10 किलोमीटर दूर राशन लाने को मजबूर हैं.

पूर्णिया के अमौर से सुनील कुमार की रिपोर्ट

PDS Ration Shop Closed: बिहार के पूर्णिया जिला अंतर्गत अमौर प्रखंड के डहुआबाड़ी गांव में सरकारी तंत्र और आपूर्ति विभाग की बड़ी उदासीनता सामने आई है. डहुआबाड़ी पंचायत के इस गांव में पिछले पांच माह से जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) की दुकान पर ताला लटका हुआ है. इसके चलते गांव के पांच अलग-अलग वार्डों में रहने वाली करीब 5,000 की आबादी को हर महीने मिलने वाले सरकारी अनाज के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं. ग्रामीणों को अपना पेट पालने के लिए रौटा बाजार होते हुए लगभग 10 किलोमीटर की दूरी तय कर नहराकोल गांव जाना पड़ रहा है, जिससे समय और पैसे दोनों की भारी बर्बादी हो रही है.

मरिया नदी तोड़ती है सीधा संपर्क; रौटा बाजार होकर काटना पड़ता है लंबा चक्कर

  • मरिया नदी का रोड़ा: डहुआबाड़ी और नहराकोल गांव के बीच भौगोलिक रूप से मरिया नदी की तेज धारा बहती है. नदी पर सुगम पुल या सीधे रास्ते की व्यवस्था न होने के कारण दोनों गांवों के बीच का सीधा संपर्क टूटा हुआ है.
  • अतिरिक्त आर्थिक बोझ: सीधा रास्ता न होने के कारण ग्रामीणों को विवश होकर रौटा बाजार के रास्ते एक लंबा और थकाऊ चक्कर काटना पड़ता है. इस सफर में सबसे अधिक परेशानी वृद्धों, महिलाओं और दिव्यांगों को उठानी पड़ रही है, जिनके लिए इस भीषण गर्मी में 10 किलोमीटर दूर जाकर राशन का भारी बोझा उठाना एक मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना बन गया है.

2021 में मिली थी राहत, पांच महीने पहले फिर ठप हुई व्यवस्था

ग्रामीणों ने बताया कि उनकी इस परेशानी को देखते हुए अगस्त 2021 में वर्तमान विधायक अख्तरुल ईमान तथा तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) अमरेंद्र कुमार पंकज के विशेष प्रयासों से डहुआबाड़ी गांव में ही जन वितरण प्रणाली की दुकान की वैकल्पिक व्यवस्था सुचारू की गई थी. इस पहल से पांचों वार्ड के लोगों को अपने ही गांव में राशन मिलने लगा था और उन्हें दूसरे गांवों की खाक नहीं छाननी पड़ती थी. लेकिन, पिछले पांच महीनों से बिना किसी ठोस कारण के इस दुकान के संचालन को अचानक बंद कर दिया गया है, जिससे पूरी व्यवस्था पुनः पुरानी बदहाली पर लौट आई है. इस समस्या को लेकर ग्रामीण उप सरपंच रूकसाना खातून, मो. इस्माइल, सुलतान, सरयू प्रसाद मोदक, मो. आजम, आसमीन, फिरोजा एवं अलगुन सहित दर्जनों कार्डधारियों ने तीखा आक्रोश व्यक्त किया है. ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने प्रखंड से लेकर जिला स्तर के आपूर्ति पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को लिखित आवेदन सौंपे हैं, लेकिन पांच महीने बीत जाने के बाद भी नतीजा सिफर ही रहा है.

“ठोस पहल नहीं हुई तो करेंगे आंदोलन”; एमओ ने दिया जांच का आश्वासन

पांच हजार की आबादी वाले इस क्षेत्र में राशन दुकान का बंद होना एक गंभीर मानवीय समस्या है. यदि प्रशासन ने शीघ्र ही हमारी दुकान को बहाल नहीं किया, तो हम सभी कार्डधारी रौटा-अमौर मुख्य मार्ग को जाम कर लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.

इस पूरे जनहित के मामले पर जब प्रखंड के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (MO) संजय कुमार से बात की गई, तो उन्होंने अपनी संक्षिप्त विभागीय टिप्पणी में कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है. डहुआबाड़ी के कार्डधारियों की सुविधा के लिए कौन सा सरल और निकटतम उपाय निकाला जा सकता है, इसको लेकर वे स्वयं बहुत जल्द क्षेत्र का भौतिक सत्यापन और जांच करेंगे. उन्होंने भरोसा दिया कि जांच के तुरंत बाद ग्रामीणों के लिए स्थानीय स्तर पर ही अनाज वितरण की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि उन्हें नदी पार कर नहराकोल न जाना पड़े.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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