बायसी. बायसी अनुमंडल में व्यवहार न्यायालय बनाने के लिए सरकार ने 10 एकड़ जमीन अधिग्रहण किया है . जमीन अधिग्रहण के क्रम में भूधारियों के पंचाट के प्रकाशन में कई तरह की त्रुटियों का आरोप सामने आया है. आरोप है कि जमीन का मालिक कोई और है ,मगर पंचाट में किसी दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज है. एक ही खेसरा के अधिग्रहण जमीन में अलग-अलग व्यक्ति को अलग-अलग मुआवजा दिया जा रहा है . इस मामले में अनुमंडल पदाधिकारी अभिषेक रंजन से पूछने पर बताया कि मामला अभी कोर्ट में चल रहा है, कोर्ट का जो फैसला होगा वही मान्य होगा. इधर, भूधारियों ने जिला प्रशासन को आवेदन दिया है. इसमें आरोप है कि सईदूर रहमान 1972 में अधिग्रहण की हुई जमीन में एक एकड़ 5 डिसमिल जमीन बेच चुका है. 35 डिसमिल जमीन सोहराब, अख्तर व वहाब को बेचा है और 35 डिसमिल आले रसूल एवं 35 डिसमिल शब्बीर को बेचा गया है. खरीदार के पास जमीन का कागजात मौजूद है. मगर सरकारी स्तर पर जो जमींदार का गजट प्रकाशन हुआ है उसमें अभी तक सईदुर रहमान का ही नाम दिखा रहा है. एक खेसरा में तोहिद का नाम होना चाहिए, मगर गजट में मोहम्मद शरीफ का नाम दिखा रहा है . इस तरह के और भी कई मामले हैं. भू-धारियों का यह भी कहना है कि जो भी जमीन अधिग्रहण हुआ है उसी खेसरा में 2012 में 83000 रुपये प्रति डिसमिल जमीन बिका था. आज सात लाख रुपये प्रति डिसमिल जमीन बिक रहा है. मगर सरकारी मुआवज प्रति डिसमिल 27200 रुपये ही देने की बात कही जा रही है. सभी जमीन बिल्कुल अनुमंडल के नजदीक है .भू-धारियों की मांग है कि अभी जिस दर से जमीन बिक रही है उसका चार गुना जोड़कर सरकार भुगतान करे. इस बात को लेकर भू-धारियों ने जिला पदाधिकारी को आवेदन दिया .
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