तीन माह के अन्दर 36 कुपोषित बच्चों को एनआरसी में मिला जीवन दान

राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल परिसर

पूर्णिया. राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल परिसर में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र पर विगत तीन महीने में कुपोषण के शिकार 36 बच्चों को नया जीवन मिला है. ये सभी बच्चे विगत वर्ष दिसंबर से लेकर इस वर्ष के फरवरी माह के मध्य एनआरसी में भर्ती किये गये थे. जिनका उपचार करते हुए ग्रसित कुपोषित बच्चों को स्वस्थ्य और सुरक्षित कर उनके घर भेजा गया. इस सम्बन्ध में सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया ने बताया कि शिशु के जन्म के छः महीने बाद भी अगर शिशु के शरीर में पर्याप्त विकास नहीं पाया जाता है तो ऐसे कुपोषित बच्चों को स्वस्थ्य विभाग द्वारा बेहतर उपचार के लिए जीएमसीएच में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जाता है. एनआरसी में कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए चिकित्सा पदाधिकारी और पोषण सलाहकार उपस्थित रहते हैं जिनके द्वारा कुपोषित बच्चों का आवश्यक उपचार किया जाता है. इस दौरान कुपोषित बच्चों को आवश्यकतानुसार जीएमसीएच के शिशु विशेषज्ञ से उनकी जांच कराते हुए उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. कुपोषित बच्चों की आवश्यक जांच और उपचार के लिए एनआरसी पूर्णिया में एक चिकित्सा पदाधिकारी और 6 स्टाफ नर्स नियुक्त किये गये हैं.

कुपोषित बच्चों की पहचान के लिए प्रखंडों में चलाया गया विशेष अभियान

डीपीसी डॉ सुधांशु शेखर ने बताया कि 5 साल तक के सभी कुपोषित और गंभीर कुपोषण से पीड़ित बच्चों की स्वास्थ्य जांच और उपचार के लिए मेडिकल एग्जामिनेशन के बाद उचित इलाज एवं खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जाता है जो सरकार द्वारा निःशुल्क है. एनआरसी पूर्णिया में कुछ समय से कुपोषित बच्चों की कमी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के सभी प्रखंडों में विशेष अभियान चलाया गया है. इस दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा क्षेत्र के विभिन्न प्रखंडों से कुपोषण से पीड़ित बच्चों की विशेष जांच और उपचार के लिए जीएमसीएच में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जा रहा है.

प्रतिदिन कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य का किया जाता है मूल्यांकन

एनआरसी के एफ-सैम ट्रेंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रजनीश सिंह ने बताया कि यहां कुपोषित बच्चों के प्रतिदिन के पोषण क्षमता का मूल्यांकन किया जाता है तथा उन्हें पोषित बनाने के लिए आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है. इस दौरान कुपोषित बच्चों का तीन दिन तक लगातार प्रतिदिन 5 ग्राम प्रति किलो के दर से विकास होने पर या भर्ती के समय के वजन से 15 प्रतिशत वजन बढ़ जाने पर संबंधित बच्चों को छुट्टी दे दी जाती है. एनआरसी में भर्ती बच्चों को छुट्टी से पहले सम्पूर्ण टीकाकरण स्थिति की भी जांच की जाती है. अगर कोई कुपोषित बच्चा किसी भी टीकाकरण से वंचित पाया जाता है तो ऐसे बच्चों को सम्पूर्ण टीकाकरण कराते हुए घर भेजा जाता है.

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By SATYENDRA SINHA

SATYENDRA SINHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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