प्रतिनिधि, बनमनखी . सिविल कोर्ट, बनमनखी में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में लंबित एवं प्री-लिटिगेशन मामलों का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर व्यापक निपटारा किया गया. लोक अदालत के दौरान बैंक संबंधित कुल 1,939 मामलों को सुनवाई के लिए ली गयी. 14 आपराधिक (क्रिमिनल) वादों का भी निपटारा पक्षकारों की आपसी सहमति से किया गया. लोक अदालत में बैंक ऋण वसूली, बिजली-पानी बिल सहित सुलहयोग्य दीवानी और फौजदारी मामलों पर सुनवाई हुई.बैंक से जुड़े कुल 48,09450 रूपये की वास्तविक वसूली दर्ज की गई, जिससे बैंकों को त्वरित राहत मिली और खाताधारकों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से निजात मिली.लोक अदालत में पीठासीन पदाधिकारी के रूप में मुंसिफ सह न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, बनमनखी अनुराग उपस्थित रहे.सदस्य के रूप में अधिवक्ता मुरलीधर मिश्रा ने सहयोग किया. इस अवसर पर पीठासीन पदाधिकारी श्री अनुराग ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य न्याय को सरल, सुलभ और शीघ्र बनाना है. आपसी सुलह से न केवल समय और खर्च की बचत होती है, बल्कि समाज में सौहार्द और विश्वास भी मजबूत होता है. आपराधिक मामलों में सुलह नई शुरुआत का अवसर प्रदान करती है.लोक अदालत के सफल संचालन में न्यायालय के सहायक कर्मी धीरज कुमार,विनीत कुमार रंजन एवं शम्भू शंकर दयाल प्रसाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही. वहीं पैरा लीगल वॉलंटियर के रूप में राजेश कुमार सहित अन्य की सक्रिय उपस्थिति रही.
राष्ट्रीय लोक अदालत में 1939 मामलों की सुनवाई, 48 लाख बैंक ऋण वसूली
48 लाख बैंक ऋण वसूली
