पूर्णिया : शहर और इसके आस पास के जिन इलाकों में सड़क किनारे कूड़ा डंप किया जा रहा है, वहां न केवल समीप में लोगों की आबादी बसी हुई है बल्कि उधर से आम शहरवासियों की आवाजाही भी होती है. कूड़ों से निकलने वाले बदबू से लोगों का जीना मुहाल है क्योंकि बरसात की सड़ांध के कारण कचरे वाली ढेर के बगल से गुजरना बीमारी को दावत देने जैसा है. शहरवासी यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि यदि उन कूड़ों से बीमारी फैली तो इलाज की जिम्मेवारी क्या नगर निगम लेगा? एक बार फिर शहर से बाहर डम्पिंग ग्राउंड बनाने की मांग जोर पकड़ रही है.
शहर में सड़क किनारे डंप हो रहा है कचरा
पूर्णिया : शहर और इसके आस पास के जिन इलाकों में सड़क किनारे कूड़ा डंप किया जा रहा है, वहां न केवल समीप में लोगों की आबादी बसी हुई है बल्कि उधर से आम शहरवासियों की आवाजाही भी होती है. कूड़ों से निकलने वाले बदबू से लोगों का जीना मुहाल है क्योंकि बरसात की सड़ांध […]

गौरतलब है कि नगर निगम द्वारा पूर्णिया से बेलौरी होते हुए गुलाबबाग जीरोमाइल जाने वाली बायपास सड़क के किनारे गैस गोदाम के समीप कचरा का डम्प किया जा रहा है. कूड़ा डम्पिंग का यह काम कप्तानपुल के समीप भी दोनों तरफ होता रहा है. वैसे, कचरा डम्पिंग के लिए कप्तान पुल के आगे पेट्रोल पंप के समीप भी एक नयी जगह चुनी गयी है.
पहले गर्मी और धूप के कारण लोगों को इसका बहुत एहसास नहीं होता था पर लगातार बारिश के बाद उन कचरों की सड़ांध के कारण लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. यह शिकायत आम है कि उससे इतना दुर्गंध निकलता है कि बगल से गुजरना मुश्किल हो जाता है. पहले यहां कम आवाजाही होती थी पर अब वहां आस पास बाजार भी बस गये हैं और आवाजाही भी बढ़ गयी है.
स्थानीय नागरिक मो. जहीर बताते हैं कि शहर आने-जाने के लिए यही प्रमुख सड़क है पर कचरा के दुर्गंध के कारण स्थिति ऐसी है कि उस रास्ते से गुजरते हुए दम घुटने लगता है. इधर से गुजरने वाली जयकिसुन साह का कहना है कि बसों से गुजरने के दौरान महिलाएं अक्सर उल्टी करने लगती हैं जबकि बच्चों को भी उबकाई आ जाती है. लोगों ने इस तरह कूड़ा डंप किये जाने पर आपत्ति जतायी.