11 अगस्त के बाद क्या करेंगे प्रशांत किशोर? बांकीपुर उपचुनाव में BJP क्यों हारी और RJD के लिए कैसे बढ़ा खतरा

Prashant Kishor: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 64,151 वोट लाकर बांकीपुर विधानसभा सीट जीत लिया. बीजेपी के नीरज कुमार को 44,827 वोट मिले जबकि आरजेडी कैंडिडेट की जमानत जब्त हो गई. राजद की रेखा गुप्ता मात्र 14,273 वोटों में ही सिमट गईं. प्रशांत किशोर की इस जीत के बाद कई तरह के मुद्दों पर चर्चा तेज है. खासकर अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आगे प्रशांत किशोर की स्ट्रैटेजी क्या होगी.

Prashant Kishor: रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर समेत कई विकास के मुद्दों के साथ प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उतरी थी. लेकिन उस वक्त एक भी सीट पर पार्टी की जीत नहीं हो पाई.

इन्हीं मुद्दों के साथ जन सुराज बांकीपुर उपचुनाव 2026 में उतरी. लेकिन इस बार पार्टी ने जीत दर्ज कर ली. ऐसे में अब सवाल है कि 9 महीनों में ऐसा क्या बदल गया कि पीके को जनता ने चुना? आखिर बीजेपी का गढ़ जिस विधानसभा को कहा जाता था, उसी में वह हार कैसे गई. पीके की जीत तेजस्वी यादव और पूरे राजद के लिए खतरा हो सकता है और प्रशांत किशोर की आगे की रणनीति क्या हो सकती है... पढ़िए पूरी रिपोर्ट...

बीजेपी के कैंडिडेट नीरज सिन्हा को 19,324 वोटों से हराने के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर 11 अगस्त के बाद शपथ ग्रहण करेंगे. इसके बाद औपचारिक रूप से विधायक के तौर पर प्रशांत किशोर काम करना शुरू कर देंगे. 11 तारीख से ही प्रशांत किशोर बांकीपुर विधानसभा के कई वार्ड में घूमने की प्लानिंग कर चुके हैं. इस दौरान वे लोगों से बातचीत करेंगे, उनकी परेशानियों को जानेंगे और उसी के आधार पर विकास का ब्लूप्रिंट तैयार करेंगे.

आगे क्या हो सकती है पीके की रणनीति?

बांकीपुर में जीत के बाद प्रशांत किशोर ने कहा था कि 3 महीने में इस विधानसभा में बदलाव दिखने लगेगा. इस दावे को वह पूरा करने पर काम कर सकते हैं. इतना ही नहीं, बिहार में होने वाले पंचायत चुनाव को लेकर भी उन्होंने प्लानिंग कर ली है. प्रशांत किशोर के मुताबिक, जन सुराज आगे आने वाले चुनावों पर भी अब फोकस करेगी और इसके लिए अभी से ही तैयारी शुरू कर दी गई है.

पीके की तरफ से यह कहा गया है कि जन सुराज सभी जिला परिषदों और वार्डों में अपने कैंडिडेट उतारेगी. इस तरह से अभी से ही प्रशांत किशोर ने पंचायत चुनाव में उतरने का मूड सेट कर लिया है. कहा जा रहा है कि प्रशांत किशोर बांकीपुर उपचुनाव की तरह आगे के चुनावों में जातिगत मॉडल को छोड़ विकास के मॉडल पर काम कर सकते हैं. जन सुराज के संगठन को और मजबूत करने और बिहार की आगामी राजनीति में अपनी पार्टी को एक व्यापक विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर सकते हैं.

किन मुद्दों ने प्रशांत किशोर को बांकीपुर में दिलाई जीत?

कहा जा रहा है कि जिन मुद्दों को लेकर प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज 2025 के विधानसभा चुनाव में उतरी थी, उन्हीं मुद्दों के साथ वह बांकीपुर उपचुनाव में भी उतरी. लेकिन दोनों चुनाव के परिणाम में जमीन-आसमान का अंतर रहा. 2025 में तो जन सुराज एक भी सीट नहीं जीत सकी लेकिन बांकीपुर उपचुनाव में जीत गई. ऐसे में इस 9 महीने के दौरान बदला क्या?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भोजपुर में भरत तिवारी का एनकाउंटर, UGC बिल, स्टूडेंट प्रोटेस्ट, Gen-z का बीजेपी के खिलाफ आक्रोश, जातिगत छोड़ विकास का मॉडल, नीट पेपर लीक समेत अन्य खासकर युवाओं से जुड़े मुद्दों ने प्रशांत किशोर को जीत दिलाई. बांकीपुर बीजेपी का गढ माना जाता है लेकिन इन्हीं मुद्दों की वजह से कहीं ना कहीं वोटर्स ने इस बार प्रशांत किशोर को समर्थन दिया.

BJP और RJD के वोटर जन सुराज की तरफ कैसे शिफ्ट हुए?

राजनीतिक जानकारों की माने तो, ऐसे कई कारण हैं, जिसकी वजह से बीजेपी और आरजेडी के वोटर जन सुराज की तरफ शिफ्ट हुए.

  • बांकीपुर विधनसभा के लिए सवर्ण वोटर बेहद मायने रखते हैं. लेकिन इस बार के चुनाव में कहीं ना कहीं सवर्ण बीजेपी से नाराज दिखे. चुनाव में उनका वोट जन सुराज की तरफ शिफ्ट किया. हाल ही में जब बांकीपुर में हार पर बीजेपी ने समीक्षा की तो सवर्ण समाज की नाराजगी को दूर करने के लिए बिहार के सभी 38 जिलों में सवर्ण समाज से जुड़े मामलों की निगरानी और समाधान के लिए विशेष नोडल अधिकारियों की तैनात किए जाने का फैसला लिया गया.
  • सवर्ण समाज की नाराजगी की वजह भोजपुर में भरत तिवारी का एनकाउंटर और UGC बिल जैसे मुद्दे माने जा रहे हैं. राजनीतिक जानकारों की माने तो, खासकर भरत तिवारी के एनकाउंटर के बाद सवर्णों के बीच सरकार के खिलाफ नाराजगी दिखी.
  • बीजेपी ने पहले अभिषेक कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाकर नामांकन दाखिल कराया, लेकिन अगले ही दिन उनका नाम वापस ले लिया गया. इसके बाद नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा गया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उम्मीदवार बदलने के इस फैसले ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा की. उनका यह भी कहना है कि सीट से कई वरिष्ठ नेता दावेदारी कर रहे थे, लेकिन नए चेहरे को टिकट दिए जाने से असंतोष बढ़ा.
  • बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी उम्मीदवार नीरज सिन्हा अपने चुनाव प्रचार से ज्यादा मीडिया के सामने दिए गए बयानों को लेकर चर्चा में रहे. बातचीत के दौरान वह कई बार शब्दों पर अटकते नजर आए, जिसके बाद उनके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए. विपक्ष ने इन क्लिप्स को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा, जबकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पार्टी ने अपेक्षाकृत कम राजनीतिक अनुभव वाले चेहरे पर दांव लगाया. नीरज सिन्हा पहले मंडल अध्यक्ष और बूथ स्तर पर संगठन में एक्टिव रहे हैं, लेकिन विधायक स्तर की राजनीति का उन्हें अनुभव नहीं है, ऐसे में जनता ने उन्हें स्वीकार नहीं कर जन सुराज को समर्थन दिया.
  • आरजेडी कैंडिडेट रेखा गुप्ता की बात करें तो, वह भी सियासत में कोई बड़े चेहरे के तौर पर नहीं थीं. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी पूरे चुनाव के दौरान विदेश रहे और आखिर में सिर्फ दो दिन रोड शो किया. लेकिन इन सब के बीच प्रशांत किशोर लोगों के बीच बने रहे और उनके मुद्दे को उठाते रहे. ऐसे में बांकीपुर की जनता को कहीं ना कहीं तीसरा और बेहतरीन ऑप्शन मिला.
  • राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि इस चुनाव से बीजेपी को सबक मिली. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 5 बार यहां से विधायक रहे. इसके पहले उनके पिता नवीन किशोर सिंह विधायक रहे. बांकीपुर विधानसभा को बीजेपी का गढ भी माना जाता है, ऐसे में बीजेपी को उम्मीद थी कि वह चुनाव आसानी से जीत जाएगी लेकिन पीके की जीत से उन्हें सबक मिली कि संगठन और मजबूत, स्थानीय मुद्दों को अधिक प्रभावी ढंग से उठाने और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप अभियान चलाने की जरूरत है. हाल ही में बीजेपी की हुई बैठक में भी इस पर चर्चा की गई थी.
  • इस चुनाव परिणाम को लेकर जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को लेकर भी चर्चा हो रही है. इस चर्चा को सिर्फ आम जनता ही नहीं बल्कि जेडीयू के विधायक अनंत सिंह ने भी छेड़ दी. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा था, अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री रहते तो बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम कुछ और ही होता. इस तरह से कहीं ना कहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व को लेकर एनडीए में ही सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

राजद और तेजस्वी के लिए प्रशांत किशोर बन सकते हैं खतरा

बिहार की सियासत में अब तक राजद को मुख्य विपक्ष का चेहरा माना जाता था. लेकिन बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत के बाद तेजस्वी यादव और राजद के लिए मुश्किलें खड़ीं हो सकतीं हैं. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में प्रशांत किशोर मजबूत विपक्ष का चेहरा बन सकते हैं. इस बार के चुनाव में राजद के 'एमवाई समीकरण' में भी कहीं ना कहीं प्रशांत किशोर ने सेंध लगाई.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर विपक्षी मतदाताओं को नया नेतृत्व चाहिए, तो प्रशांत किशोर उस भूमिका में उभर सकते हैं. प्रशांत किशोर लगातार सक्रिय राजनीति करते हैं, जबकि तेजस्वी यादव की राजनीतिक सक्रियता पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं. बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान तेजस्वी यादव गायब रहे. साथ ही चुनाव के दौरान भी कुछ ऐसी ही स्थिति रही. राजद कैंडिडेट रेखा गुप्ता के लिए सिर्फ दो दिन उन्होंने चुनाव प्रचार किया. इस बीच प्रशांत किशोर की जीत के बाद मजबूत विपक्ष के चेहरे के तौर पर खुद को साबित करने के लिए तेजस्वी यादव को मेहनत करना पड़ सकता है.

11 से 19 अगस्त के बीच इन वार्डों में घूमेंगे पीके

11 अगस्त- वार्ड नंबर: 15, 18, 40

12 अगस्त- वार्ड नंबर: 19, 22, 23, 26

13 अगस्त- वार्ड नंबर: 29, 16, 39

14 अगस्त- वार्ड नंबर: 17, 38, 25

16 अगस्त- वार्ड नंबर: 30, 24, 27

17 अगस्त- वार्ड नंबर: 28, 31, 35, 21

18 अगस्त- वार्ड नंबर: 37, 42, 36

19 अगस्त- वार्ड नंबर: 41

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लेखक के बारे में

By प्रीति दयाल

प्रीति दयाल, बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहीं हैं. यूट्यूब पोर्टल से पत्रकारिता की शुरुआत की. इसके बाद कई मीडिया संस्थानों में काम कर चुकीं हैं. डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग में साढ़े 3 साल का अनुभव है. खबरें लिखना, वेब कंटेंट तैयार करने और ट्रेंडिंग सब्जेक्ट पर सटीक और प्रभावी खबरें लिखने का काम कर रहीं हैं.

प्रीति दयाल ने पत्रकारिता की पढ़ाई संत जेवियर्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी से की. इस दौरान पत्रकारिता से जुड़ी कई विधाओं को सीखा. मीडिया संस्थानों में काम करने के दौरान डिजिटल जर्नलिज्म से जुड़े नए टूल्स, तकनीकों और मीडिया ट्रेंड्स को सीखा.

पहली बार लोकसभा चुनाव 2024 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे बड़े चुनावी कवरेज में काम करने का अवसर मिला. इस दौरान बिहार की राजनीति, चुनावी रणनीतियों, राजनीतिक दलों और प्रमुख नेताओं से जुड़े कई प्रभावशाली और पाठकों की रुचि के अनुसार कंटेंट तैयार किए. चुनावी माहौल को समझते हुए राजनीतिक विश्लेषण और ट्रेंडिंग मुद्दों पर आधारित खबरों को आसान और प्रभावी भाषा में तैयार करना कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है.

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