Assistant Professor Recruitment Age Limit 55 Years : सहायक प्राध्यापक भर्ती नियमावली-2026 में संशोधन समेत विभिन्न मांगों को लेकर गर्दनीबाग में पिछले 21 दिनों से अनशन कर रहे शोध छात्रों के आंदोलन को लेकर बड़ी सहमति बनी है. सोमवार देर रात राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) के साथ करीब दो घंटे चली वार्ता के बाद शोध छात्रों ने अनशन वापस लेने का आश्वासन दिया. वार्ता में सहायक प्राध्यापक भर्ती नियमावली में संशोधन और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी.
55 साल होगी अधिकतम उम्र सीमा, 43 साल की सीमा में बदलाव का प्रस्ताव
वार्ता में सहायक प्राध्यापक बहाली के लिए अधिकतम उम्र सीमा 43 से बढ़ाकर 55 वर्ष करने के प्रस्ताव पर सहमति बनी है. नियमित बहाली शुरू होने के बाद उम्र सीमा को चरणबद्ध तरीके से कम करने पर भी विचार किया जायेगा. मांगों पर निर्णय के लिए राज्यपाल मुख्यमंत्री से विमर्श के बाद 15 दिनों के भीतर एक समिति गठित करेंगे. समिति में प्रमुख शिक्षाविदों के साथ शिक्षा क्षेत्र में काम करने का अनुभव रखने वाले प्रशासकों को शामिल किया जायेगा.
नियमावली-2026 में संशोधन तक बहाली पर रोक
तय किया गया है कि एसोसिएशन की प्रमुख मांगों पर विचार कर सहायक प्राध्यापक भर्ती परिनियम-2026 में आवश्यक संशोधन किया जायेगा. संशोधन होने तक इस नियमावली के आधार पर नियमित या संविदा सहायक प्राध्यापकों की बहाली नहीं होगी. यानी फिलहाल 2026 के भर्ती परिनियम को स्थगित रखने का प्रस्ताव है.
लिखित परीक्षा में पूछे जा सकते हैं ऑब्जेक्टिव सवाल
सहायक प्राध्यापक बहाली में लिखित परीक्षा कराने और उसे वस्तुनिष्ठ यानी ऑब्जेक्टिव रखने का प्रस्ताव भी सामने आया है. लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के एपीआइ यानी एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडिकेटर स्कोर की गणना की जायेगी. लिखित परीक्षा और एपीआइ के अंकों को जोड़कर समेकित मेरिट सूची तैयार करने पर विचार होगा. इसके आधार पर निर्धारित संख्या में अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जायेगा.
इंटरव्यू में टीचिंग डेमो भी शामिल करने का प्रस्ताव
बहाली प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने के लिए साक्षात्कार में टीचिंग डेमो शामिल करने का भी प्रस्ताव रखा गया है. इससे अभ्यर्थियों की विषयगत जानकारी के साथ उनके पढ़ाने की क्षमता का भी आकलन किया जा सकेगा.
पीएचडी के लिए 30 अंक से कम अधिमानता नहीं
एपीआइ स्कोर की गणना में मैट्रिक और इंटरमीडिएट के अंकों को शामिल नहीं करने की मांग पर भी विचार होगा. नेट और जेआरएफ के लिए अधिकतम 11 अंक तक तथा पीएचडी के लिए अधिकतम 30 अंक से कम नहीं रखने की मांग रखी गयी है. साथ ही शोध प्रकाशन और शिक्षण अनुभव को भी एपीआइ स्कोर में शामिल करने पर विचार किया जायेगा.
शोध प्रकाशन और अनुभव की तय होगी स्पष्ट परिभाषा
शोध प्रकाशन और अनुभव को एपीआइ में शामिल करने के साथ इसकी स्पष्ट परिभाषा तय करने की बात भी हुई है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फर्जी या गलत दस्तावेजों के आधार पर कोई अभ्यर्थी अनुचित लाभ नहीं उठा सके.
अतिथि सहायक प्राध्यापकों की मांगों पर भी होगा विचार
अतिथि सहायक प्राध्यापकों को वर्तमान में नियुक्त संविदा सहायक प्राध्यापकों की तरह न्यूनतम वेतनमान और उस पर महंगाई भत्ता देने की मांग भी समिति के समक्ष रखी जायेगी. सभी विश्वविद्यालयों में नवीकरण की प्रक्रिया एक समान करने तथा शैक्षणिक प्रमाणपत्र, शोध पत्र और अनुभव के सत्यापन के बाद अतिथि सहायक प्राध्यापकों को 65 वर्ष तक कार्य करने का अवसर देने की मांग पर भी विचार होगा.
हर साल रिक्त पदों पर नियमित बहाली का सुझाव
अधिकतम उम्र सीमा को एक साथ कम करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से घटाने और इस अवधि में प्रत्येक वर्ष रिक्त पदों के विरुद्ध सहायक प्राध्यापकों की नियमित बहाली करने के सुझाव पर भी समिति विचार करेगी.
वार्ता में शिक्षक प्रतिनिधि एमएलसी जीवन कुमार, अतिथि सहायक प्राध्यापक डॉ. कुंदन सिंह, डॉ. उमेश कुमार, डॉ. विभा रानी तथा शोध छात्र आशीष कुमार और मोनू कुमार राय समेत अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे.
