1975 की बाढ़ के बाद बना था पटना का ‘सुरक्षा कवच’,

VIDEO: 1975 की बाढ़ के बाद बना था पटना का ‘सुरक्षा कवच’, क्या आज भी गंगा के रौद्र रूप से बचा पाएगी राजधानी?

1975 की विनाशकारी बाढ़ के बाद पटना को बचाने के लिए एक मजबूत सुरक्षा दीवार बनाई गई थी, जिसे 'सुरक्षा कवच' कहा जाता है. वर्तमान में गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए, इस दीवार की क्षमता और राजधानी की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

Bihar Flood News : साल 1975. पटना ने उस साल ऐसी भीषण बाढ़ देखी थी, जिसने राजधानी की तस्वीर बदल दी थी. शहर के बड़े हिस्से में बाढ़ का पानी पहुंच गया था और लोगों को सड़कों पर जिंदगी गुजारने को मजबूर होना पड़ा था. उस भयावह बाढ़ के बाद राजधानी को भविष्य में गंगा के पानी से बचाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया.

गंगा के पानी को शहर में घुसने से रोकने के लिए बनी दीवार

1975 की बाढ़ के बाद पटना में गंगा किनारे सुरक्षा दीवार और बाढ़ सुरक्षा से जुड़ी संरचनाएं विकसित की गयीं. इस दीवार का मकसद गंगा के बढ़े जलस्तर और बाढ़ के पानी को शहर के भीतर प्रवेश करने से रोकना था. यही वजह है कि इसे लंबे समय से पटना का ‘सुरक्षा कवच’ कहा जाता रहा है. 2013 की बाढ़ के दौरान भी इस रिटेनिंग वॉल को राजधानी की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया गया था.

क्या यही दीवार बचाती है कंकड़बाग और पटना के बड़े हिस्से को?

पटना की बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों के बीच इस दीवार को लेकर एक खास भरोसा है. लोगों का कहना है कि अगर गंगा का पानी सुरक्षा दीवार को पार कर शहर की तरफ बढ़ता है तो पटना के निचले और घनी आबादी वाले इलाकों के लिए खतरा बढ़ सकता है. यही वजह है कि मौजूदा बाढ़ के दौरान इस दीवार की मजबूती और सुरक्षा पर सबसे ज्यादा नजर है.

राजेंद्र घाट पर मौजूद है पटना का यही सुरक्षा कवच

फिलहाल हमारी मौजूदगी पटना के राजेंद्र घाट पर है. यहीं से हम आपको दिखा रहे हैं वह सुरक्षा दीवार, जिसे पटना का सुरक्षा कवच कहा जाता है. एक तरफ गंगा का लगातार बढ़ता जलस्तर है और दूसरी तरफ शहर की सुरक्षा के लिए खड़ी यह दीवार. सवाल यह है कि बढ़ते जलस्तर के बीच यह सुरक्षा कवच कितना मजबूत है और क्या यह पटना को बाढ़ के पानी से बचाने में सक्षम है?

2026 की बाढ़ में फिर सामने आया दीवार का महत्व

इस बार गंगा का जलस्तर पटना में बेहद ऊंचे स्तर तक पहुंच चुका है. हालिया रिपोर्टों के मुताबिक गांधी घाट पर गंगा का पानी अपने उच्चतम बाढ़ स्तर को भी पार कर चुका है. ऐसे हालात में पटना की बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था और टाउन प्रोटेक्शन वॉल की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है. प्रशासन ने सुरक्षा दीवार के गेटों और स्लुइस गेटों की निगरानी बढ़ायी है तथा कमजोर बिंदुओं पर जरूरी कदम उठाये हैं.

सवाल बड़ा है- अगर गंगा और बढ़ी तो क्या होगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर गंगा का जलस्तर अभी और बढ़ता है तो पटना की यह सुरक्षा दीवार कितना दबाव झेल पाएगी? क्या मौजूदा बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था राजधानी को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त है? और अगर कहीं से पानी सुरक्षा कवच को पार करता है तो क्या पटना के पास उससे निपटने की पूरी तैयारी है?

पटना के लिए यह सिर्फ दीवार नहीं, भरोसे की आखिरी सीमा

1975 की बाढ़ की याद आज भी पटना के इतिहास में दर्ज है. उस त्रासदी के बाद तैयार की गयी बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था ने राजधानी को एक अतिरिक्त सुरक्षा दी. आज जब गंगा फिर उफान पर है, तब राजेंद्र घाट से खड़ी यह दीवार सिर्फ ईंट और कंक्रीट की संरचना नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की सुरक्षा से जुड़ा सवाल बन गयी है.

Also Read : VIDEO: पटना में गंगा ने तोड़ा 2016 का रिकॉर्ड, NIT घाट पर कमर तक पानी; बच्चों के सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By विवेक सिंह

विवेक सिंह की डिजिटल मीडिया और जनसरोकारों से जुड़े विषयों में विशेष रुचि रही है. वे बिहार के मिथिला क्षेत्र के निवासी हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 2 वर्षों से सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं.

उन्होंने मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई की है. शिक्षा के दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, जनसंचार, फोटो जर्नलिज्म, मोबाइल जर्नलिज्म (MOJO) और मीडिया रिसर्च की गहन समझ विकसित की है. अध्ययन के दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की, जहां उन्हें न्यूजरूम की कार्यप्रणाली, टीवी समाचार निर्माण, स्क्रिप्ट लेखन, विजुअल चयन, फील्ड रिपोर्टिग और प्रसारण प्रक्रिया को नजदीक से समझने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ.

पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्राउंड रिपोर्टिंग, जनमत संग्रह (Public Opinion), सामाजिक मुद्दों की कवरेज और स्थानीय समाचारों के संकलन का व्यापक अनुभव प्राप्त किया. उन्होंने विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और जनहित से जुड़े विषयों पर जमीनी स्तर से रिपोर्टिंग करते हुए आम लोगों की आवाज को प्रमुखता से सामने लाने का कार्य किया है.

इसके साथ ही वे NGO से जुड़कर सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं. स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, युवा सशक्तिकरण, धार्मिक और जनकल्याण से जुड़े अभियानों में उनकी विशेष भागीदारी रही है. समाज के विभिन्न वर्गों के बीच जागरूकता फैलाने और सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयासों में वे निरंतर योगदान देते रहे हैं.

वर्तमान में विवेक सिंह राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, खेल, अपराध, रियल-टाइम समाचारों, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक विषयों से जुड़ी खबरों पर लेखन करते हैं. डिजिटल पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें SEO (Search Engine Optimization), कंटेंट प्लानिंग और ट्रेंड-आधारित समाचार लेखन की अच्छी समझ है. ब्रेकिंग न्यूज की पहचान, त्वरित कवरेज और कम समय में तथ्यपरक समाचार तैयार करना उनकी प्रमुख कार्यक्षमताओं में शामिल है.

विवेक सिंह किसी भी समाचार को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की जांच और सत्यापन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं. वे विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करने के बाद ही समाचार प्रकाशित करते हैं, जिससे उनकी रिपोर्टिंग और लेखन में सटीकता तथा विश्वसनीयता बनी रहती है. तथ्यपरक, निष्पक्ष और भरोसेमंद पत्रकारिता में विश्वास रखने वाले विवेक सिंह पाठकों तक गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >