अनिल अग्रवाल के ठिकानों पर रेड, वेदांता ग्रुप की मुश्किलें बढ़ीं, मनोज झा ने सरकार पर उठाए सवाल

ED Raid: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल से जुड़े कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय ने छापेमारी की है. कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) से जुड़े कथित उल्लंघन के मामले में की जा रही है. इस बीच राजद सांसद मनोज झा ने भी इस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं.

ED Raid: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल से जुड़े कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापेमारी की है. जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) से जुड़े एक मामले में की जा रही है. जांच एजेंसी विदेशी लेनदेन और वित्तीय गतिविधियों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है. फिलहाल इस मामले में वेदांता ग्रुप की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.

FEMA के तहत कब होती है कार्रवाई?

ईडी तब कार्रवाई करती है जब किसी व्यक्ति या कंपनी पर विदेशी मुद्रा से जुड़े नियमों के उल्लंघन का संदेह होता है. इसमें विदेशों में अवैध तरीके से धन भेजना, हवाला कारोबार, विदेश में संपत्ति खरीदना या विदेशी निवेश से जुड़े नियमों का पालन नहीं करना जैसे मामले शामिल हो सकते हैं. ऐसे मामलों में ईडी वित्तीय रिकॉर्ड और लेनदेन की गहन जांच करती है.

किन क्षेत्रों में कारोबार करता है वेदांता ग्रुप?

वेदांता देश की बड़ी खनन और धातु कंपनियों में शामिल है. कंपनी एल्युमिनियम उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी मानी जाती है. इसके अलावा देश में जिंक उत्पादन में भी इसकी बड़ी हिस्सेदारी है. समूह कच्चे तेल के उत्पादन से भी जुड़ा हुआ है. कंपनी ने आने वाले वर्षों में भारत में बड़े स्तर पर निवेश की योजनाएं भी घोषित की हैं.

वेदांता ग्रुप इससे पहले भी विदेशी मुद्रा नियमों से जुड़े मामलों में जांच का सामना कर चुका है. 2004 में समूह की एक कंपनी और उसके कुछ निदेशकों पर विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे थे. उस समय जांच के बाद जुर्माना भी लगाया गया था.

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ईडी की कार्रवाई पर क्या बोले मनोज झा?

राजद सांसद मनोज झा ने इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि अनिल अग्रवाल और वेदांता ग्रुप पर ईडी की कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब राजनीतिक और कारोबारी हलकों में कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं.

मनोज झा ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जांच एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, लेकिन जब बार-बार कार्रवाई का पैटर्न राजनीतिक या कारोबारी असहमतियों के आसपास दिखाई देता है तो सवाल खड़े होना स्वाभाविक है. उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थाओं के इस्तेमाल को लेकर गंभीर बहस की जरूरत है.

अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसी को क्या डॉक्यूमेंट मिलते हैं और वेदांता ग्रुप इस पूरे मामले पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है. आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Paritosh shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.
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