बीबॉस की स्थिति सुधारने के लिए दूर करनी होगी कर्मियों की कमी : अनिल

गुरुवार को विकास प्रबंधन संस्थान (डीएमआइ) और एजुकेट गर्ल्स संस्थान ने होटल चाणक्य में कार्यशाला का आयोजन किया

-डीएमआइ और एजुकेट गर्ल्स संस्थान ने बीबॉस को मजबूत बनाने के लिए रोडमैप निर्माण अध्ययन पर आयोजित की कार्यशाला

संवाददाता, पटना

बिहार बोर्ड ऑफ ओपन स्कूलिंग एंड एग्जामिनेशन (बीबॉस) को मजबूत बनाने के लिए रोडमैप निर्माण के अध्ययन पर गुरुवार को विकास प्रबंधन संस्थान (डीएमआइ) और एजुकेट गर्ल्स संस्थान ने होटल चाणक्य में कार्यशाला का आयोजन किया. कार्यशाला को संबोधित करते हुए बीबॉस के सीइओ अनिल कुमार ने कहा कि रोडमैप निर्माण के अध्ययन में कई अच्छे सुझाव आये हैं. इस पर काम किया जायेगा. संस्थान के सामने सबसे बड़ी चुनौती कर्मियों की कमी है. शिक्षा विभाग ड्रॉपआउट बच्चों के लिए कई योजनाओं का संचालन कर रहा है. बीबॉस की स्थिति को बेहतर करने के लिए इसे परीक्षा संचालन का अधिकार दिया जाये. उन्होंने शिक्षा सहित विभिन्न विभागों द्वारा कौशल विकास के लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि जब मैंने पदभार लिया तो बीबॉस में ढ़ाई हजार स्टूडेंट्स पंजीकृत थे, आज 21 हजार तक पहुंच गया है. संसाधन की व्यवस्था हो जाये तो पंजीकृत स्टूडेंट्स की संख्या दो लाख तक पहुंच जायेगी. वर्तमान में 12 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिसमें से 10 कर्मचारी इधर-उधर के काम में व्यस्त रहते हैं. यहां किसी भी पदाधिकारी की स्थानीय नियुक्ति नहीं है. संस्थान में संसाधन की कमी है. स्टडी सेंटर कंप्यूटर है तो ऑपरेटर नहीं है. मात्र एक कर्मचारी के भरोसे स्टडी सेंटर को संचालित किया जा रहा है. बीबॉस पर विश्वास नहीं है. विश्वास बनाये रखने के लिए सिस्टम को ठीक करना होगा. बिहार बोर्ड की तरह बीबॉस को परीक्षा एजेंसी बनाया जा सकता है. बिहार में हर साल साढ़े चार लाख स्टूडेंट्स 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षा मिला कर फेल होते हैं. फेल स्टूडेंट्स भी बीबॉस से एग्जाम देकर सफलता प्राप्त कर सकता है.

विद्यार्थियों की जरूरत के अनुरूप हो कोर्स:

पैनल चर्चा सत्र में वक्ताओं ने कहा कि कोर्स विद्यार्थियों की जरूरत के अनुरूप और सर्वहित में होना चाहिए. वर्तमान समय में कौशल विकास आधारित कोर्स की मांग है. यदि विद्यार्थियों को मैट्रिक-इंटर की डिग्री के साथ-साथ कौशल विकास से जुड़ने का अवसर दिया जाये, तो विद्यार्थी अधिक आकर्षित होंगे. इस चर्चा में बिहार स्किल डेवलपमेंट मिशन के संयुक्त निदेशक सुरेश कुमार सिंह, बीबॉस के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी केएन झा, एससीइआरटी की संयुक्त निदेशक डॉ रश्मि प्रभा, एनएसडीसी की क्षेत्रीय प्रमुख भावना वर्मा और एजुकेट गर्ल्स के अलका सिंह ने अपने विचार साझा किये.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Anurag pradhan

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें
Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >