हर प्रखंड से दो शिक्षकों को आपदाओं से निबटने की दी जायेगी ट्रेनिंग

शिक्षा विभाग की ओर से बच्चों को किताबी ज्ञान से अलग सुरक्षित शनिवार कार्यक्रम के तहत इंटरेक्टिव तरीके से पढ़ाई करायी जाती है.

संवाददाता, पटना

शिक्षा विभाग की ओर से बच्चों को किताबी ज्ञान से अलग सुरक्षित शनिवार कार्यक्रम के तहत इंटरेक्टिव तरीके से पढ़ाई करायी जाती है. इसमें विशेष रूप से आपदा प्रबंधन पर फोकस किया जाता है. विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत सुरक्षित शनिवार के नये वार्षिक कैलेंडर के अनुसार शिक्षकों को आपदाओं से बचाव को लेकर दो दिवसीय विशेष ट्रेनिंग दी जायेगी. दो दिवसीय विशेष ट्रेनिंग में भाग लेने के लिए निर्धारित तिथि के एक दिन पहले पटना स्थित चंद्रगुप्त प्रबंध संस्थान में उपस्थित होना पड़ेगा. कैलेंडर में दिये गये अलग-अलग महीने के अनुसार आपदा प्रबंधन के बारे में जागरूक करने को लेकर प्रत्येक प्रखंड से दो शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण दिया जायेगा. राज्य के विभिन्न जिलों के शिक्षकों को तीन अप्रैल से 27 मई तक अलग-अलग प्रमंडलों के लिए तैयार किये गये चार्ट के अनुसार ट्रेनिंग दी जायेगी. सबसे पहले तीन और चार अप्रैल को पटना प्रमंडल से कुल 200 शिक्षकों को एससीइआरटी की ओर से ट्रेनिंग दी जायेगी. इसके अलावा मगध प्रमंडल में सात अप्रैल, तिरहुत में पांच अप्रैल, सारण में 12 मई को शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जायेगी. दो दिवसीय ट्रेनिंग में अगलगी से खतरे व बचाव, चक्रवाती तूफान, डायरिया से बचाव, विद्यालय सुरक्षा पखवारा का आयोजन, बाढ़ से बचाव आदि विषय की जानकारी दी जायेगी. इसके अलावा गांव के बच्चों के साथ गांव, टोले व मोहल्ले का बाल सुरक्षा समिति की मदद से हजार्ड हंट विषय पर भी जानकारी दी जायेगी. एससीइआरटी की ओर से सुरक्षित शनिवार कार्यक्रम के लिए टॉपिक तैयार कर लिया गया है.

बच्चों में आत्मविश्वास विकसित और आपदा प्रबंधन की जानकारी देना मुख्य उद्देश्य

सुरक्षित शनिवार कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूली बच्चों में जोखिम की पहचान और उससे बचाव के लिए ज्ञान और आत्मविश्वास विकसित करना है. जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि सुरक्षित शनिवार की गतिविधियां प्रत्येक शनिवार के चेतना सत्र और अंतिम सत्र में अनिवार्य रूप से आयोजित करना है. जिस माह में पांचवां शनिवार पड़े, तो उस स्थिति में बच्चों को स्वच्छता संबंधी विषयों के बारे में जानकारी देने के साथ ही अभ्यास भी कराना है. स्कूल में लंबी छुट्टी होने की स्थिति में बच्चों को गृहकार्य के रूप में विद्यालय सुरक्षा से संबंधित विषयों का अभ्यास एवं उस पर चर्चा करने संबंधी कार्य देना है.

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