डीजीपी ने डिप्टी सीएम से मुलाकात कर क्राइम कंट्रोल की रणनीति साझा की

राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने सोमवार शाम को राज्य के डिप्टी सीएम सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी से उनके सरकारी आवास पर पहुंचकर मुलाकात की.

संवाददाता, पटना राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने सोमवार शाम को राज्य के डिप्टी सीएम सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी से उनके सरकारी आवास पर पहुंचकर मुलाकात की. उन्होंने गृह मंत्री को कानून व्यवस्था के लिए पुलिस द्वारा उठाये गये कदम के बारे में जानकारी दी. साथ ही पदभार ग्रहण करने का अनुरोध किया. डीजीपी की डिप्टी सीएम के साथ मुलाकात इसलिए भी महत्वूपण मानी जा रही है क्योंकि नई सरकार बनने के बाद उन्होंने एक नया पुलिसिंग फ्रेमवर्क लागू किया है. जिसके तहत संगठित अपराध की परिभाषा का विस्तार कर दिया गया है. दो या अधिक लोगों के समूह द्वारा लगातार किए जा रहे अपराध अब संगठित अपराध माने जाएंगे. इसमें अपहरण, लूट, वाहन चोरी, जमीन कब्जा, सुपारी किलिंग, साइबर फ्रॉड, आर्थिक अपराध, अवैध हथियार तस्करी और मानव तस्करी आदि शामिल है. राज्य में बड़े अपराधी उत्पन्न न हो इसके लिए अब चोरी, पॉकेटमारी और धोखाधड़ी जैसे छोटे अपराध को भी संगठित अपराध में शामिल कर दिया गया है. एक दिन पहले विनय कुमार ने सभी जिलों के एसएसपी- एसपी को पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि पुलिस छोटे अपराधों की अब कड़ी निगरानी करे. आरोपियों को संगठित अपराध नेटवर्क का हिस्सा मानकर कार्रवाई सुनिश्चित हो इसके लिए रेंज डीआइजी, आइजी और मुख्यालय स्तर पर एडीजी विधि व्यवस्था को निगरानी के लिए निर्देश दिया गया है. डीजीपी ने पुलिस को निर्देश दिया है कि अपराध के पैमाने के बजाय उसके स्वरूप और अपराधी के नेटवर्क पर ध्यान दिया जाए. इस कदम का उद्देश्य छोटे अपराधों को शुरुआती स्तर पर रोककर बड़े अपराधों पर अंकुश लगाना है. पुलिस अकादमी और सभी प्रशिक्षण केंद्र इस नई अवधारणा को अपने पाठ्यक्रम में शामिल करेंगे ताकि भविष्य की पुलिसिंग को इसी दृष्टिकोण से आकार दिया जा सके.

सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को निर्देश दिया गया है कि संगठित अपराध का मतलब सिर्फ बड़े गिरोह, समूह या हाई-प्रोफाइल मामले नहीं हैं. अब तक पुलिस जिस तरह छोटे चोरी, छिनतई और धोखाधड़ी के मामलों को मामूली अपराध समझकर हल्के में लेती रही है, अब ये भी संगठित अपराध की श्रेणी में आएंगे. यानी अपराध का पैमाना नहीं, बल्कि अपराध की प्रकृति और अपराधी का नेटवर्क महत्वपूर्ण होगा.

थाना पुलिस को करनी होगी विशेष निगरानी, रिपोर्टिंग और ट्रैकिंग

स्मॉल ऑर्गनाइज्ड क्राइम नाम की नई श्रेणीमें चोरी, छिनतई, धोखाधड़ी, अवैध टिकट बिक्री, जुआ और सट्टेबाजी, तथा प्रश्नपत्र बिक्री जैसे अपराधों को स्पेशल रिपोर्टेड (एसआर ) केस माना जाएगा. यानी प्रत्येक मामले की अनिवार्य रूप से विशेष निगरानी, रिपोर्टिंग और ट्रैकिंग की जाएगी. भारतीय न्याय संहिता 2023 के प्रावधानों का हवाला देते हुए डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि छोटे अपराधों में शामिल लोग अक्सर बाद में बड़े सिंडिकेट का हिस्सा बन जाते हैं, इसलिए ऐसे नेटवर्क को शुरुआती स्तर पर ही ध्वस्त करना आवश्यक है.

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Author: RAKESH RANJAN

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