श्रीअरविंद महिला कॉलेज : दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शोधपत्र की प्रस्तुति के साथ हुई समाप्त

श्रीअरविंद महिला कॉलेज में आयोजित विकसित भारत में उच्च शिक्षा की भूमिका विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुक्रवार को समापन हो गया.

संवाददाता, पटना श्रीअरविंद महिला कॉलेज में आयोजित विकसित भारत में उच्च शिक्षा की भूमिका विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुक्रवार को समापन हो गया. इस संगोष्ठी का आयोजन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के सहयोग से पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग, अर्थशास्त्र विभाग और श्रीअरविंद महिला कॉलेज के संयुक्त रूप से किया गया. समापन सत्र की शुरुआत दर्शनशास्त्र विभाग के गोपाल कुमार ने संगोष्ठी की वैचारिक पृष्ठभूमि को रेखांकित किया. मुख्य अतिथि नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो केसी सिन्हा ने विकसित भारत की कल्पना को शक्ति और शिक्षा से जोड़ते हुए कहा कि बिना आत्मबल और ज्ञान परंपरा के, यह सपना अधूरा रहेगा. ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो संजय झा ने कहा कि हम केवल आचार्य नहीं, आचरण करवाने वाले भी हों और यह कि स्वाध्याय ही आत्मबल का स्रोत है. आइआइपीए दिल्ली के कोषाध्यक्ष प्रो अनिल दत्त मिश्रा में भारतीय परंपरा के मूल्यों और आचरण के बीच की दूरी पर चिंता प्रकट की. उन्होंने स्वामी विवेकानंद को भारत का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रवादी बताते हुए वैल्यू क्राइसिस पर चर्चा की और कहा कि केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बातें पर्याप्त नहीं, उसके क्रियान्वयन की भी आवश्यकता है. संगोष्ठी की आयोजन सचिव डॉ नीतु तिवारी ने संपूर्ण संगोष्ठी की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमें उन्होंने दो दिनों के सत्रों, प्रस्तुत शोध पत्रों और विमर्श के मुख्य बिंदुओं को संक्षेप में साझा किया. अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के उत्तर-पूर्व क्षेत्र के प्रमुख प्रो अजीत कुमार झा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को केंद्र में रखे बिना शिक्षा की कोई भी योजना अधूरी है. इस संगोष्ठी के सूत्रधार प्रो अविनाश कुमार झा ने कहा कि यदि हम अपनी सांस्कृतिक बुनियाद से कटते गए, तो शिक्षा केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित रह जाएगी, जिसका समाज को कोई व्यापक लाभ नहीं होगा. प्राचार्या प्रो साधना ठाकुर ने अपने प्रेरक ने कहा शिक्षा केवल डिग्री नहीं, दृष्टि है, और वह दृष्टि तभी सार्थक है जब उसमें राष्ट्र के प्रति संवेदना हो. मंच संचालन श्वेता तिवारी ने और धन्यवाद ज्ञापन आदित्य भारद्वाज ने किया. समापन सत्र के पूर्व एक प्लेनरी सत्र का भी आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता प्रो संजय झा ने की. इस सत्र में चार शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र का वाचन किया. इस प्लेनरी सत्र को प्रो दिलीप सिंह ने भी संबोधित किया. इस संगोष्ठी में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना के डीएसडब्ल्यू प्रो राजीव रंजन, पूर्व डीएसडब्ल्यू प्रो एके नाग, अन्य विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के कई शिक्षकगण, शोधार्थी व विद्यार्थी उपस्थित रहे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: JUHI SMITA

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More
Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >