तीन महीने बाद सबा-फराह को मिली जरूरी दवाएं, अब हर महीने बिहार के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम करेगी स्वास्थ्य जांच

Saba-Farah Health Check-up : सिर से जुड़ी जुड़वां बहनें सबा और फराह को आखिरकार तीन महीने बाद आवश्यक दवाएं मिल गईं. स्वास्थ्य विभाग ने अब हर महीने विशेषज्ञों की टीम द्वारा उनके घर जाकर स्वास्थ्य जांच करने का आश्वासन दिया है.

Saba-Farah Health Check-up : सिर से जुड़ी जुड़वां बहनें सबा और फराह की स्वास्थ्य देखभाल को लेकर स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर सक्रिय हुआ है. तीन महीने तक दवाएं नहीं मिलने की शिकायत के बाद अब आवश्यक दवाएं उपलब्ध करा दी गई हैं और हर महीने विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनके घर जाकर स्वास्थ्य जांच करेगी.

तीन महीने बाद पहुंचीं जरूरी दवाएं

जानकारी अनुसार पटना सिविल सर्जन कार्यालय ने तीन महीने तक नियमित दवाएं नहीं मिलने की शिकायत के बाद सबा और फराह तक आवश्यक दवाएं पहुंचा दी हैं. सिविल सर्जन ने बताया कि दो दिन पहले दोनों बहनों के लिए जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है.

हर महीने विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम करेगी जांच

स्वास्थ्य विभाग ने दोनों बहनों की नियमित निगरानी के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम गठित करने का निर्णय लिया है. इस टीम में नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी, स्त्री एवं प्रसूति रोग, अस्थि रोग (ऑर्थोपेडिक्स), सर्जरी और मेडिसिन विभाग के चिकित्सक शामिल होंगे. टीम प्रत्येक महीने उनके घर जाकर स्वास्थ्य परीक्षण करेगी और आवश्यकता के अनुसार उपचार एवं दवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करेगी.

दवा नहीं मिलने से बढ़ी थीं स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां

राजाबाजार के समनपुरा निवासी 23 वर्षीय सबा और फराह जन्मजात क्रैनियोपैगस (सिर से जुड़े जुड़वां) जैसी दुर्लभ चिकित्सीय स्थिति के साथ जीवन जी रही हैं. उन्हें प्रतिदिन कई प्रकार की दवाओं की आवश्यकता होती है. पिछले कुछ महीनों तक नियमित दवा नहीं मिलने के कारण उन्हें हड्डियों में दर्द, हाथ-पैरों में सूजन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा.

परिवार ने नियमित मेडिकल विजिट की उठाई मांग

सबा-फराह के भाई मोहम्मद तमन्ना ने बताया कि आवश्यक दवाएं मिल गई हैं, लेकिन नियमित स्वास्थ्य जांच अभी शुरू नहीं हुई है. उनका कहना है कि वर्ष 2024 के बाद से चिकित्सकों की नियमित घर पर विजिट बंद है. परिवार ने पहले की तरह विशेषज्ञ चिकित्सकों की मासिक जांच व्यवस्था फिर से शुरू करने की मांग की है.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पहले भी होती थी निगरानी

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सबा-फराह की नियमित चिकित्सा निगरानी की व्यवस्था की गई थी. उस समय विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम हर महीने उनके स्वास्थ्य की जांच करती थी और समय-समय पर रिपोर्ट संबंधित उच्च संस्थानों को भेजी जाती थी. अब स्वास्थ्य विभाग ने इस व्यवस्था को फिर से नियमित रूप से लागू करने का आश्वासन दिया है.

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Author: Anand tiwari

Published by: Sakshi Kumari

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