Patna Cyber Fraud: देश में साइबर ठगी और 'डिजिटल अरेस्ट' के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. अब शातिर अपराधियों ने देश की सीमा पर अपनी सेवाएं दे चुके महेंद्रू निवासी एक रिटायर्ड फौजी को अपना शिकार बनाया है. जालसाजों ने फर्जी कानूनी कार्रवाई और देशद्रोह का झूठा डर दिखाकर एक रिटायर्ड फौजी 3,30 लाख रुपये की मोटी रकम ठग ली. यह राशि पीड़ित ने अपनी भतीजी की शादी के लिए जोड़कर रखी थी. इस धोखाधड़ी और मानसिक प्रताड़ना से टूटकर पीड़ित बुजुर्ग इस कदर अवसाद में आ गए कि उन्होंने आत्मग्लानि में अपनी जीवनलीला समाप्त करने की कोशिश भी की.
6 करोड़ 80 लाख रुपये के फर्जी खाते का दी जानकारी
जानकारी के अनुसार, ठगी के इस खेल की शुरुआत बीते 6 जून को हुई, जब फौजी के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया. फोन करने वाले ने खुद को बैंकअधिकारी बताते हुए कहा कि दिल्ली के चांदनी चौक स्थित आईसीआईसीआई बैंक में उनके नाम पर एक खाता संचालित है, जिसमें 6 करोड़ 80 लाख रुपये की संदिग्ध राशि जमा हुई है. पीड़ित ने तुरंत इस बात से इनकार किया और कहा कि उक्त बैंक में उनका कोई खाता ही नहीं है.
'देशद्रोह' का केस लगाने की दी धमकी
पीड़ित के इनकार करने के कुछ ही देर बाद अपराधियों ने दोबारा फोन किया और ih उन्हें डराना शुरू कर दिया. बदमाशों में बताया कि जिस व्यक्ति ने खाते में पैसे जमा कराए थे, उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. जालसाजों ने फौजी पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपना बैंक खाता अपराधियों को बेच दिया है और अब उनके खिलाफ 'देशद्रोह' का गंभीर मामला दर्ज किया जा रहा है. फौजी देशद्रोह का केस होने की बात से डर गए.अपराधियों ने इसी डर का फायदा उठाया और उन्हें कई दिनों तक लगातार फोन पर धमकाते हुए मानसिक रूप से बंधक यानी 'डिजिटल अरेस्ट' कर लिया.
घर की फोटो भेजी और नकली पुलिस से बात कराई
जालसाजों ने पीड़ित को पूरी तरह से अपने जाल में फंसाने के लिए उनके घर की तस्वीरें खींचकर भेजीं और पुलिस की वर्दी पहने नकली अधिकारियों से वीडियो कॉल पर बात कराई.यहाँ तक कि एक संदिग्ध व्यक्ति को उनके घर पर भी भेजा गया, जिससे पीड़ित को पूरा विश्वास हो गया कि वे वाकई किसी बड़ी मुसीबत में फंस चुके हैं.
शादी के लिए रखे हुए थे पैसे
शादी के लिए रखे पैसे किए ट्रांसफर डरे हुए रिटायर्ड फौजी ने अपने एसबीआई बैंक खाते से आरटीजीएस के माध्यम से 3,30 लाख रुपये अपराधियों द्वारा बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए. यह पैसा पीड़ित ने अपनी भतीजी की शादी की तैयारियों और उपहारों के लिए रखा था. सब कुछ गंवाने के बाद बुजुर्ग फौजी गहरे अवसाद और लोक-लाज के डर में डूब गए. उन्होंने बताया कि वे इस कदर टूट चुके थे कि किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं समझे और आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास कर बैठे.फिलहाल मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और साइबर सेल अपराधियों का पता लगाने में जुट गई है.
विशेषज्ञों की सलाह
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी जांच एजेंसी या पुलिस फोन या वीडियो कॉल पर इस तरह से किसी को 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है.ऐसे कॉल आने पर घबराएं नहीं, तुरंत फोन काटें और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं.
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