शिक्षकों का सम्मान भारतीय परंपरा और संस्कृति का है हिस्सा : नंद किशोर यादव

साहित्य सम्मेलन में नयी दिशा परिवार की ओर से 31 शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया.

संवाददाता, पटना

साहित्य सम्मेलन में नयी दिशा परिवार की ओर से 31 शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया. नये समाज को गढ़ने वाले आदरणीय शिक्षकों का सम्मान, वस्तुतः भारत की महान परंपरा और संस्कृति का हिस्सा है. शिक्षक ही विद्यार्थियों को गढ़ते हैं और उन्हें समाज के मूल्यवान नागरिक बनाते हैं. ये बातें शिक्षक-सम्मान-समारोह का उद्घाटन करते हुए बिहार विधानसभा के अध्यक्ष नंद किशोर यादव ने कहा. उन्होंने कहा कि समाज काफी तेजी से बदल रहा है. ऐसे में शिक्षकों को भी अपनी प्रणाली में परिवर्तन लाना चाहिए. समारोह के मुख्य अतिथि और सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कहा कि भारत में शिक्षकों का हमेशा सम्मान होता रहा है. क्योंकि शिक्षकों के ऊपर नयी पीढ़ी का दायित्व होता है. ये अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले समाज की रीढ़ हैं. वहीं साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ अनिल सुलभ ने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान-परंपरा ””गुरु-परंपरा”” पर आधारित है. विद्यार्थियों को शिक्षा विशाल परिसरों में बने बड़े-बड़े भवन अथवा दीवारें या वातानुकूलित कक्षाएं नहीं, योग्य और निष्ठावान आचार्यों से प्राप्त होगी. पूर्व केंद्रीय मंत्री राम कृपाल यादव, पूर्व कुलपति प्रो केसी सिन्हा, पटना की उपमहापौर रेशमी चंद्रवंशी, प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ दिवाकर तेजस्वी और कमल नयन श्रीवास्तव ने भी अपने विचार व्यक्त किये. अतिथियों का स्वागत संस्था के संरक्षक राजेश वल्लभ यादव ने तथा मंच का संचालन संस्था के सचिव राजेश राज ने किया. मौके पर अमरजीत कुमार यदुवंशी, डॉ बलराम कुमार, डॉ प्रियंका कुमारी, डॉ मनोज संधवार, डॉ मीना कुमारी परिहार, डॉ संतोष कुमार 31 शिक्षकों को सम्मानित किया गया.

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