संवाददाता, पटना
बिहार में हर तबके के लोगों को उनके संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए राज्य में सत्ता परिवर्तन जरूरी है. बहुसंख्य लोगों को अपनी शक्ति को पहचानने के साथ अपने अधिकार और हक की आवाज बुलंद करने के लिए एकजुट होकर संविधान विरोधी ताकत को दरकिनार करने की आवश्यकता है. ये बातें शुक्रवार को गांधी संग्रहालय में आयोजित बिहार की सामाजिक राजनीतिक परिस्थिति वर्तमान समय और हमार हस्तक्षेप विषय पर सम्मेलन में गांधी जी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने कही. उन्होंने कहा कि आज भारत की विविधता पर हमला हो रहा है. नागरिकों के अधिकार कुचले जा रहे हैं. दलित, अल्पसंख्यक, महिलाओं, गरीबों पर अत्याचार बढ़ा है. ऐसे माहौल में जरूरत है कि नागरिक समाज इस सत्ता पोषित सरकारी दमन के खिलाफ आवाज बुलंद करें. उन्होंने वर्तमान राजसत्ता के खिलाफ आने वाले दिनों में बिहार में पदयात्रा व संवाद के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भी लोगों को प्रेरित किया. वहीं प्रख्यात समाजवादी नेता एवं पूर्व विधायक डॉ सुनील ने कहा कि देशभर में सरकारी नीतियों के फलस्वरूप किसान आत्महत्या को मजबूर हैं. सरकार पूंजीपतियों के पक्ष में किसानों को उनके भूमि से बेदखल कर रही है. दिल्ली से आये समाजवादी नेता विजय प्रताप ने कहा कि बिहार गांधी और जयप्रकाश का कर्म स्थल रहा है. यहां के लोगों ने समय समय पर सामाजिक राजनीतिक हस्तक्षेप से देश के लोगों को राह दिखायी है. आज जरूरत है कि हम अपने समूहों से इतर अन्य समूहों के साथ संवाद स्थापित कर परिवर्तन के लिए जमीन तैयार करें. सम्मेलन में डॉ ऋतु प्रिया ने कहा कि आज के विकास मॉडल में महिलाओं को ध्यान में नहीं रखा गया है. हमें शिक्षिका, रसोइया, सेविका, सहायिका, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पुलिस में शामिल महिलाओं की समस्याओं को ध्यान में रखकर आगामी नीति बनानी चाहिए. हम अपनी आवाज खोते जा रहे हैं. पर्यावरणीय सहित विकास के मुद्दों की ध्यान में रखकर नया नरेटिव गढ़ना होगा. कार्यक्रम का संचालन समाजवादी नेता शाहिद कमाल एवं धन्यवाद यापन युवा नेता ऋषि आनंद ने किया. इसके अलावा सामाजिक कार्यकर्ता उदय, रविंद्र कुमार, अफजल हुसैन, कपालेश्वर राम, सिस्टर डोरोथी, शकील अहमद, अनिल कुमार राय, फादर प्रकाश लुईस, डॉ योगेंद्र, महेंद्र यादव, मंथन, प्रदीप पीटर, अरविंद अंजुम, प्रोफेसर आलोक, महिला नेत्री मुकुंद, उत्तर प्रदेश से आये साथी राम धीरज, मध्य प्रदेश के रीवा से आये अजय खरे, झारखंड से आये घनश्याम आदि ने भी अपनी बात रखी.
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