पटना विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से नयी शिक्षा निधि के तहत पाठ्यक्रम की पुस्तकें उपलब्ध करायी जायेंगी. विश्वविद्यालय की ओर से चार लाख रुपये की लागत से एनइपी आधारित पुस्तकों की खरीदारी की जायेगी. विश्वविद्यालय के सीबीसीएस के तहत किताबों की कमी की को लेकर विद्यार्थियों की परेशानी जल्द ही दूर होगी. विश्वविद्यालय की ओर से इन किताबों की खरीदारी कर सेंट्रल लाइब्रेरी को उपलब्ध कराया जायेगा. विद्यार्थियों को नये सत्र से किताबों की सुविधा प्रदान की जायेगी. इसके लिए पहले ही विश्वविद्यालय ने विभिन्न विभागों की ओर से प्रमुख किताबों की सूची मांगी गयी थी. विभागों की ओर से किताबों की सूची तैयार कर भेज दी गयी है. विद्यार्थियों को सुविधा प्रदान के साथ ही नैक में बेहतर ग्रेड प्राप्त करने के उद्देश्य से इसकी तैयारी चल रही है. पुस्तकों की खरीदारी के लिए पीएम उषा फंड से मिली राशि का इस्तेमाल किया जायेगा. एनइपी आधारित पुस्तकों की खरीदारी के लिए जेम पोर्टल पर टेंडर फ्लोट किया जायेगा. एनइपी आधारित पाठ्यपुस्तकों की मदद से नया सिलेबस पढ़ने में विद्यार्थियों को आसानी होगी. इसके साथ ही क्रेडिट फ्रेमवर्क के अनुसार पढ़ना भी विद्यार्थियों के लिए आसान होगा. नयी पुस्तकों में रिसर्च और प्रोजेक्ट वर्क के लिए बड़ा फ्रेमवर्क और अतिरिक्त सामग्री प्राप्त होगी.
विद्यार्थियों का स्किल डेवलप होगा
एनइपी आधारित पाठ्यपुस्तकों से विद्यार्थियों को विषयों और टॉपिक के अधिक केस के बारे में पढ़ने की सुविधा मिलेगी. इसके सात ही चैप्टर में इंप्लोयबिल्टी स्किल, आंत्रप्नेयोरशिप और डिजिटल लिट्रेसी को भी बढ़ावा मिलेगा. पुरानी पुस्तकों की तुलना में एनइपी आधारित पुस्तकें जो एनसीइआरटी पैटर्न वाली सस्ती हैं. ज्यादातर प्रकाशन नयी एडिशन की किताबें खरीदने पर तीन से पांच वर्ष तक अपडेट की सुविधा भी मुफ्त में उपलब्ध कराते हैं.
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